लखनऊ के हजरतगंज इलाके में पीएम-सीएम का विवादित पोस्टर लगाने के मामले में उप्र नवनिर्माण सेना के संस्थापक अमित जानी की गिरफ्तारी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मंगलवार को अंतरिम रोक लगा दी है। इस मामले में अमित ने याचिका दायर की थी।
याचिका में बताया गया था कि 12 दिसंबर को पार्क रोड पुलिस चौकी के दरोगा फिरोज ने हजरतगंज थाने में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। इसमें बताया था कि फिरोज बंदरियाबाग चौराहे से सरकारी ड्यूटी से लौट रहे थे।
उस समय विवादित पोस्टर पर उनकी निगाह पड़ी, पोस्टर पर नीचे उप्र नवनिर्माण सेना लिखा हुआ था। पोस्टर में शासन विरोधी बातें लिखी थीं। दर्ज करवाई गईं एफआईआर में सरकारी आदेशों की अवहेलना और नागरिकों में मतभेद व गुस्सा फैलाने के वक्तव्य जारी करने के आरोप लगाए गए। वहीं सर्वाजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धारा दो एवं तीन भी केस में दर्ज किए गए।
याची के अनुसार इस मामले में अन्य आरोपियों की बेल हो चुकी है, जिनमें प्रकाशक भी शामिल हैं। याची की वकील सुनीति सचान के मुताबिक अमित जानी ने इस एफआईआर की वैधता को चुनौती देते हुए अपनी गिरफ्तारी को रोक लगाने की प्रार्थना की थी। उनका कहना था कि एफआईआर में लगाए गए आरोपों से कोई अपराध नहीं बनता है।
ऐसे में याची को अपराधी मानते हुए उसे गिरफ्तार करने पर रोक लगाई जानी चाहिए। राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध किया गया। याची की वकील के मुताबिक जस्टिस अजय लांबा और जस्टिस करुणेश सिंह पंवार ने इस मामले में सुनवाई के बाद अमित जानी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। अगली सुनवाई 11 मार्च तक यह रोक प्रभावी रहेगी दी।