हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सुमित मिश्र हत्याकांड में पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि केस की तफ्तीश साफ -सुथरे व पक्षपात रहित तरीके से कराएं। कोर्ट ने मामले के विवेचक को भी निर्देश दिया कि छह हफ्ते में विवेचना पूरी कर रिपोर्ट संबंधित अदालत में पेश करें।
न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा व न्यायमूर्ति सरोज यादव की खंडपीठ ने यह आदेश मामले में साजिश रचने के आरोपी बनाए गए ललितकांत पांडेय की याचिका पर दिया।
याचिका में आरोपी की गिरफ्तारी पर रोक लगाने तथा वर्तमान एफआईआर को रद्द किए जाने की गुजारिश की गई थी। साथ ही केस की निष्पक्ष विवेचना कराए जाने का आग्रह किया गया था।
पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने मामले में आमने आए वीडियो की सच्चाई के साथ यह भी पूछा था कि क्या सुमित शराब के नशे में था?
इसके तहत पुलिस आयुक्त का निजी जवाबी हलफनामा दाखिल कर पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर के बयान का हवाला देकर कहा गया कि मृतक शराब के नशे में नहीं था।
यह भी कहा गया कि याची को गिरफ्तार करने की कोशिश नहीं की जा रही है। इस पर कोर्ट ने पुलिस आयुक्त व विवेचक को उक्त आदेश देकर याचिका को निस्तारित कर दिया।
याची की ओर से दलील दी गई थी कि वास्तव में सुमित मिश्र की मृत्यु पुलिस पिटाई से हुई थी। पुलिस ने खुद को बचाने के लिए उसे व अन्य लोगों को फंसा दिया है।
याचिका में अपने दावे की पुष्टि के लिए याची ने वीडियो क्लीपिंग्स का भी हवाला दिया। कोर्ट ने पुलिस आयुक्त को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर जवाब देने के साथ ही यह भी बताने का आदेश दिया था कि वर्तमान याची के विरुद्ध अब तक क्या साक्ष्य सामने आए हैं।
मालूम हो कि अलीगंज थाना क्षेत्र में बीती 16 जुलाई को सुमित मिश्र नाम के युवक की अगवा कर हत्या कर देने के आरोप में पुलिस ने दो युवकों आयुष व आदर्श को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
बाद में एक वीडियो वायरल हुआ, जिसके आधार पर दावा किया गया था कि सुमित की जान पुलिस की पिटाई से गई है। इस मामले में डीसीपी उत्तरी के पर्यवेक्षण में एसीपी अलीगंज तफ्तीश कर रहे हैं।