आतंकी वारदातों में शामिल आरोपियों के केस वापसी के मामले में अखिलेश सरकार बुरी तरह फंसती नजर आ रही है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने आतंकियों के केस वापसी मामले में अखिलेश यादव की सरकार को करारा झटका दिया है।
कोर्ट ने अखिलेश यादव सरकार द्वारा आतंकियों के केस वापसी मामले में कहा है कि अखिलेश सरकार ऐसा नहीं कर सकती। इसके लिए केंद्र की अनुमति जरूरी है।
कोर्ट ने साफ किया है कि आतंक और केंद्रीय कानूनों से जुड़े मामलों में केंद्र की स्वीकृति हर राज्य के लिए जरूरी है। राज्य सरकार अपने स्तर पर ऐसे मुकदमे वापस नहीं ले सकती।
न्यायाधीश देवी प्रसाद सिंह, न्यायाधीश अजय लांबा और न्यायाधीश अशोक पाल सिंह की तीन सदस्यीय बेंच ने गुरुवार को यह व्यवस्था दी।
स्वतंत्र तरीके से काम करें वकील
कोर्ट ने कहा कि देश की संप्रुभता से जुड़े मामलों में सरकार को तार्कित होना चाहिए। जजों की बेंच ने सरकारी वकीलों को भी आदेश दिया कि अगर शासन-प्रशासन ऐसे मामलों में सीधे आदेश देते हैं, तो उन्हें स्वतंत्र तरीके से काम करना चाहिए।
वृहद पीठ से मांगे थे दिशानिर्देश
आतंकी गतिविधियों में लिप्त मुस्लिम नौजवानों के मुकदमे वापस लेने के मामले में रंजना अग्निहोत्री और अन्य द्वारा दायर याचिका की सुनवाई कर रही बेंच ने चार सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट की वृहद पीठ से उस पर दिशानिर्देश मांगे थे।
उसमें पहला सवाल यही था कि क्या आंतक और केंद्रीय कानून से जुड़े मामलों में राज्य सरकार केस वापसी का फैसला कर सकती है।
केंद्र सरकार ने असिस्टेंट सॉलिसिटल जनरल केसी कौशिक और जयंत सिंह तोमर के जरिए अदालत को बताया था कि ऐसे मामलों में केंद्र की स्वीकृति जरूरी होनी चाहिए।
यह मामला इन सवालों के जवाबों के साथ वापस मूल बेंच को भेज दिया गया है, जहां से इसका फैसला आएगा। न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश महेंद्र दयाल को अब फैसला सुनाना है।
गौरतलब है कि फैजाबाद, लखनऊ, बाराबंकी और वाराणसी में हुई आतंकी वारदातों के केस वापसी के सरकार के फैसले पर कोर्ट ने रोक लगाई हुई है।