इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने शुक्रवार को नागरिकता संशोधन कानून लागू करने का विरोध करने वाले राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए केंद्र को निर्देश दिए जाने की याचिका खारिज कर दी।
न्यायमूर्ति मुनीश्वरनाथ भंडारी और न्यायमूर्ति मनीष कुमार की खंडपीठ ने ये आदेश स्थानीय अधिवक्ता अशोक पांडेय की याचिका पर सुनाया।
याची का कहना था कि देश के कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री खुलेआम सीएए का विरोध कर रहे हैं और राज्यों में इसे न लागू करने की बात कह रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि इन राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाने की कार्रवाई करे।
याची का तर्क था कि संसद द्वारा पारित कानून को लागू करने के लिए हर राज्य बाध्य है और इसे लागू करने से इंकार नहीं कर सकते। याची का कहना था, चूंकि केंद्र सरकार इसके बावजूद भी ऐसे राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू करने की कार्रवाई नहीं कर रही है लिहाजा केंद्र सरकार को इसके लिए निर्देश दिया जाए।
याचिका में सिर्फ केंद्र सरकार को ही पक्षकार बनाया गया था। अदालत ने कहा कि याचिका में अन्य जरूरी पक्षकार नहीं बनाए गए हैं ऐसे में इसे खारिज किया जाता है। उधर, केंद्र सरकार की तरफ से सहायक सॉलिसिटर जनरल एसबी पांडेय पेश हुए।