सादुल्लाहनगर थाने की जमीन कब्जा कर मजार बनाए जाने के मामले में नया मोड़ आ गया है। पूर्व सपा विधायक आरिफ अनवर हाशमी की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। साथ ही सवाल उठाया है कि राजस्व रिकॉर्ड सरकारी अभिरक्षा में रहता है तो उसमें कोई विधायक कैसे हेराफेरी कर सकता है। साल 2013 में आरिफ अनवर हाशमी विधायक थे और प्रशासन की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में वह आरोपित हैं।
पूर्व विधायक ने एफआईआर के विरूद्व हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए बीते चार अप्रैल को कई सवाल उठाए। एफआईआर में खतौनी में नाम परिवर्तन करने वाले किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। साल 2013 में हुए हेराफेरी के लिए सीधे तत्कालीन सपा विधायक को ही जिम्मेदार ठहराया गया था। जबकि राजस्व नियमावली के तहत यह माना गया कि खतौनी में नाम का परिवर्तन राजस्व अधिकारी के ही स्तर से संभव है। ऐसे में हाईकोर्ट ने सवाल किया है कि कोई निजी व्यक्ति राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी बिना राजस्व अधिकारी से मिले कैसे कर सकता है।
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इस पूरे मामले में दो सप्ताह में काउंटर एफीडेविट मांगा है साथ ही याची पूर्व विधायक आरिफ अनवर हाशमी को भी एफआईआर की जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है। 15 दिन बाद काउंटर एफीडेविट दाखिल होने के बाद हाईकोर्ट मामले की अगली सुनवाई की तिथि तय करेगा।
मामले में गिरफ्तार किए जा चुके हैं पूर्व विधायक के भाई
थाने की जमीन पर मजार बनाकर कब्जा करने और भाई मारुफ अनवर हाशमी को समिति बनाकर मुतव्वली बनाने के मामले में बीते एक अप्रैल को एफआईआर दर्ज कराई गई। जिसमें साल 2013 में हेराफेरी कर थाने की जमीन को खतौनी में समिति के नाम दर्ज कराने के लिए हेराफेरी का आरोप पूर्व विधायक पर लगे थे। स्थानीय लेखपाल सुनील कुमार ने मामले की एफआईआर में पूर्व विधायक आरिफ अनवर हाशमी, उनके भाई मारूफ अनवर हाशमी, परिवार के सदस्यों और समिति के सदस्यों के नाम दर्ज कराई थी। जिसमें मारुफ अनवर हाशमी गिरफ्तार भी किए जा चुके हैं।
तत्कालीन एसडीएम व तहसीलदार आरोपों से घिरे
खतौनी में हेराफेरी के समय उतरौला तहसील में तैनात एसडीएम व तहसीलदार अब जांच के दायरे में आ गए हैं। पूरे मामले की जांच कर रहे अतिरिक्त एसडीएम संतोष ओझा ने बताया कि मामले की जांच रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। अभी किसी तरह के आदेश की जानकारी नहीं मिली है। जो भी निर्देश होगा, उसके तहत कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि साल 2013 में एसडीएम राकेश कुमार सिंह व तहसीलदार प्रमोद कुमार राय तहसील में कार्यरत थे। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व प्रदीप कुमार का कहना है कि सादुल्लाहनगर थाने के जमीन प्रकरण में कार्रवाई की गई थी। उच्च न्यायालय के आदेश की जानकारी अभी नहीं मिली है। जो भी आदेश होगा, उसके तहत यथोचित कार्रवाई की जाएगी।