हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी के 30 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों को उनके पते का उल्लेख किए बगैर पेंशन दिए जाने के मामले में सख्त रुख अख्तियार किया है।
कोर्ट ने सूबे के स्वतंत्रता सेनानी व राजनीतिक पेंशन विभाग के प्रमुख सचिव को इन आरोपों की तीन माह में जांच कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार के संबंधित विभाग या मंत्रालय को भी पक्षकार बनाए जाने की इजाजत दे दी है।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने यह आदेश एक पीआईएल पर दिया। इसमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पेंशन दिए जाने में कथित धांधली का मुद्दा उठाया गया था।
याचिका में आरोप था कि राजधानी में यह पेंशन पाने वालों की सूची में ऐसे 30 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रित हैं, जिनके पते उपलब्ध नहीं हैं, जबकि नियमानुसार पेंशन पाने वालों के पते लिखे होने चाहिए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी 2015 को नियत की है।