बुंदेलखंड इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (बीआईईटी) झांसी में चहेते के चयन के लिए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी के कुलपति की अनदेखी को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है।
कोर्ट ने कुलपति की जगह शिक्षाविद् को प्रोफेसरों की चयन समिति का मुखिया बनाए जाने के सरकार के आदेश को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए निरस्त कर दिया। अदालत ने माना कि ऐसा छिपे हुए मकसद के लए किया गया था।
रोचक तथ्य यह है कि इसी समिति को इंस्टीट्यूट के निर्देशक के भाई के चयन का भी फैसला करना था। सरकार ने चार हफ्ते में जवाबी हलफनामा पेश करने को कहा है।
जस्टिस सत्येंद्र सिंह चौहान और जस्टिस वीरेंद्र कुमार (द्वितीय) ने कहा कि ऐसा लगता है कि प्रदेश सरकार ने छिपे हुए मकसद के लिए चयन समिति का अध्यक्ष बनाने में वीसी की अनदेखी की।