धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल और अनियंत्रित हो रहे ध्वनि प्रदूषण पर रोकथाम के लिए गृह सचिव अरविंद कुमार के जवाब से हाईकोर्ट संतुष्ट नहीं है। हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने गृह सचिव को दुबारा हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
अदालत का यह भी कहना है कि ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन से अनुमति लेने की प्रक्रिया ने हालात बिगाड़ने का ही काम किया है। अदालत ने प्रदेश सरकार से अपेक्षा की है कि ध्वनि प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए वह प्रभावी कदम उठाएगी।
जस्टिस विक्रमनाथ और अब्दुल मोईन ने अपने आदेश में कहा है कि यूपीपीसीबी को पूर्व में छूट दी गई थी। अब गृह सचिव के साथ यूपीपीसीबी चेयरमैन भी अपना जवाब दाखिल करें। दोनों के हलफनामे आने पर 12 मार्च को मामले में सुनवाई होगी। हाईकोर्ट के 20 दिसंबर 2017 के आदेश के अनुपालन में गृह सचिव को दुबारा हलफनामा देना है।
वहीं, याचिकाकर्ता मोतीलाल यादव ने मांग की है कि जिस तरह एमवी एक्ट में संशोधन कर गाड़ियों से नीली-लाल बत्ती हटवाई गई, उसी तरह बुजुर्ग, बीमार और छात्रों के हित को देखते हुए लाउडस्पीकर के लिए भी फैसला लिया जाए। इससे ध्वनि प्रदूषण से काफी राहत मिल सकेगी।