वरिष्ठ अधिवक्ता जेएन माथुर ने अदालत को बताया कि उक्त अधिनियम व इसके तहत बने विनियम के अंतर्गत मृतक के आश्रित को पांच हजार रुपये पेंशन, परिवार के एक सदस्य को नौकरी, कृषि भूमि, मकान और स्नातक तक की पढ़ाई का खर्च आदि दिए जाने का प्रावधान है। मगर मकान, नौकरी अथवा पेंशन का लाभ परिवार को अब तक नहीं दिया गया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने हाथरस मामले में पीड़िता के परिवार को राहत संबंधी योजना पेश करने के निर्देश राज्य सरकार को दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम व इसके तहत बने विनियम के कानूनी प्रावधानों के तहत राहत संबंधी योजना अगर सरकार ने बनाई है, तो उसे 22 अक्तूबर को पेश करे। न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने शुक्रवार को यह आदेश हाथरस मामले में स्वत: संज्ञान द्वारा गरिमापूर्ण ढंग से अंतिम संस्कार के अधिकार शीर्षक से कायम जनहित याचिका पर दिया।
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राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही व अन्य पक्षकारों के वकील पेश हुए। पिछली सुनवाई के दौरान पीड़िता के परिवार की अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया था कि परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवजा मिल चुका है।
वहीं मामले में बतौर न्यायमित्र नियुक्त किए गए वरिष्ठ अधिवक्ता जेएन माथुर ने अदालत को बताया कि उक्त अधिनियम व इसके तहत बने विनियम के अंतर्गत मृतक के आश्रित को पांच हजार रुपये पेंशन, परिवार के एक सदस्य को नौकरी, कृषि भूमि, मकान और स्नातक तक की पढ़ाई का खर्च आदि दिए जाने का प्रावधान है। मगर मकान, नौकरी अथवा पेंशन का लाभ परिवार को अब तक नहीं दिया गया है। इस पर कोर्ट ने मामले से जुड़े सभी अधिवक्ताओं को अगली सुनवाई पर परिवार को दी जा चुकी सुविधाएं व कानून के तहत जो सुविधाएं उन्हें दी जा सकती हैं, उन सभी पहलुओं पर बताने के लिए कहा था। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 22 अक्तूबर को नियत की है।