हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार से पूछा है कि किस प्रावधान या कानून के तहत लखनऊ में पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्रियों, पूर्व सांसदों, पूर्व विधायकों समेत कई राजनीतिक दलों को सरकारी बंगले आवंटित किए गए हैं।
कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई 27 जनवरी को नियत की है। कोर्ट ने यह आदेश वर्ष 2000 से लंबित एक पीआईएल पर दिया।
यह जानकारी याची बीएन शुक्ल के अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने दी है। जैन के मुताबिक राजधानी लखनऊ में पूर्व प्रधानमंत्री समेत कई पूर्व मुख्यमंत्रियों, पूर्व सांसदों, पूर्व विधायकों समेत राजनीतिक दलों को सरकारी बंगले आवंटित किए गए जो संविधान की मंशा के खिलाफ है।
याची ने ऐसे सरकारी बंगलों को जल्द खाली कराए जाने का आग्रह भी किया है। अदालत ने इस मामले में चार कानूनी सवाल निर्धारित करते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि किस कानून या प्रावधान के तहत ये बंगले आवंटित किए गए।
सरकारी बंगलों के आवंटन को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी कई बार केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से जवाब तलब कर चुका है लेकिन यह रेवड़ियों की तरह बांटे जा रहे इन आवासों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।