चाइनीज मांझा से लगातार हो रही दुर्घटनाओं पर उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार इस दिशा में क्या कार्रवाई कर रही हैं और उस पर कैसे अमल करेंगी, दो सप्ताह में इसका जवाब दाखिल किया जाए। अदालत ने अगली सुनवाई चार जुलाई को तय की है।
चाइनीज मांझा के उत्पादन व इस्तेमाल पर प्रतिबंध के लिए मोतीलाल यादव की तरफ से दाखिल जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति विक्रमनाथ व न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन की खंडपीठ ने ये आदेश दिए।
राज्य सरकार की तरफ से मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश पांडे ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने 16 नवंबर 2017 को ही चाइनीज मांझा के निर्माण, प्रयोग और उसे स्टॉक किए जाने को पूरी तरह से प्रतिबंधित करते हुए शासनादेश जारी कर चुकी है।
उन्होंने पीठ के समक्ष शासनादेश भी पेश किया। इस पर अदालत ने कहा कि शासनादेश पर प्रभावी अमल क्यों नहीं हो रहा? यह शासनादेश है या रद्दी कागज?