इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने होटलों आदि में करोड़ों लीटर इस्तेमाल खाद्य तेल का फिर से भोज्य पदार्थों में उपयोग रोकने व इसके निस्तारण के आग्रह वाली जनहित याचिका पर भारतीय खाद्य सुरक्षा व मानक प्राधिकरण को नोटिस जारी किया है। साथ ही कोर्ट ने इस मामले में खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन (एफएसडीए) के आयुक्त को राज्य की तरफ से निजी जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति अजय कुमार श्रीवास्तव-प्रथम की खंडपीठ ने यह आदेश उद्गमय सेवा समिति की जनहित याचिका पर दिया। याचिका में इस्तेमाल खाद्य तेल का फिर से भोजन बनाने में उपयोग को जन स्वास्थ्य के लिए घातक बताते हुए इसे एकत्र कर बायोडीजल के तौर पर इस्तेमाल करने की प्रक्रिया बनाने का आग्रह किया गया है।
याची का कहना है कि प्रदेश में करोड़ों लीटर इस्तेमाल हुए खाद्य तेल व वनस्पति तेलों का फिर से भोज्य पदार्थों को बनने में उपयोग किया जा रहा है। जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए घातक है।
याचिका में खास तौर पर होटलों, रेस्तरां, कैंटीनों व अन्य खाद्य पदार्थों की दुकानों में करोड़ों लीटर ऐसे इस्तेमाल खाद्य तेल को प्रदेश स्तर पर एकत्र करने व इसकी निगरानी की प्रक्रिया बनाने की गुजारिश की गई है जिससे इसको दोबारा खाद्य पदार्थों में न उपयोग किया जा सके व इसे बायोडीजल के रुप में बदला जा सके।