यूं तो रालोद तीसरे चरण की तीन सीटों पर चुनाव लड़ रहा है लेकिन नजरें सबसे ज्यादा मथुरा में राष्ट्रीय महासचिव जयंत चौधरी पर टिकी हैं।
वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में पांच सीट जीतने वाला राष्ट्रीय लोकदल ने मतदान के तीसरे चरण में बृज क्षेत्र में कोई चूक नहीं करना चाहता है।
भाजपा ने हेमामालिनी को चुनाव मैदान में उतारकर उनकी जबरदस्त घेराबंदी की है।
आलम यह है कि भाजपा ने जातीय समीकरणों को साधने के लिए पश्चिमी यूपी के तमाम नेताओं को मथुरा भेज दिया है। जवाब में रालोद नेताओं ने भी वहां डेरा डाल दिया है।
हाईप्रोफाइल बन गई यह सीट
जयंत चौधरी मथुरा से 2009 के लोकसभा चुनाव में रिकार्ड मतों से जीते थे।
उस समय भाजपा और रालोद का गठबंधन था। इस बार भाजपा और रालोद आमने-सामने हैं। जयंत और हेमामालिनी की जंग से यह सीट हाईप्रोफाइल बनी हुई है।
जयंत के लिए मथुरा की जंग सिर्फ सांसद बनने की नहीं, रालोद की प्रतिष्ठा से भी जुड़ी है। वह अजित सिंह के पुत्र होने के साथ ही चौधरी चरण सिंह के पौत्र के रूप में उनके राजनीतिक वारिस माने जा रहे है।
उनकी हार-जीत से रालोद की सियासी संभावनाओं को आंका जाएगा।
वेस्ट के नेताओं ने डाला डेरा
भाजपा ने पश्चिमी यूपी के जाट, राजपूत, वैश्य और अन्य बिरादरियों से जुड़े नेताओं को मथुरा में जयंत के खिलाफ लामबंदी के लिए उतारा है।
अजित के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले डॉ. सत्यपाल, गाजियाबाद से प्रत्याशी रहे पूर्व जनरल वीके सिंह, मुजफ्फरनगर के उम्मीदवार डॉ. संजीव बालियान, मेरठ के प्रत्याशी और सांसद राजेन्द्र अग्रवाल, मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपों से घिरे रहे विधायक सुरेश राणा और संगीत सोम आदि मथुरा आ चुके हैं या आने वाले हैं।
तमाम बड़े नेताओं की सभाएं हो चुकी हैं। इनके जवाब में रालोद के सभी विधायक और सभी जाति-धर्मो से जुड़े प्रमुख नेता मथुरा पहुंच गए हैं।
जयंत की पत्नी, हेमा की बेटियां गांव-गांव
जयंत की घेराबंदी का रालोद को अहसास है। शायद यही वजह है कि रालोद ने प्रचार में पूरी ताकत लगा दी है।
हेमामालिनी के ग्लैमर का प्रभाव कम करने के लिए जयप्रदा की सभा कराई गई।
हेमामालिनी की दोनों बेटियां ईशा और अहाना देओल गांव-गांव जा रही हैं तो जयंत की पत्नी चारू चौधरी सुबह से शाम तक प्रचार में पसीना बहा रही हैं।
सीधे चुनाव से खतरे का अंदाज
मथुरा में फिलवक्त चतुष्कोणीय चुनाव हो रहा है। जयंत और हेमामालिनी के अलावा सपा के चंदन सिंह, बसपा के योगेश कुमार द्विवेदी और आम आदमी पार्टी के अनुज गर्ग चुनाव लड़ रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बहुकोणीय चुनाव जयंत के लिए फायदेमंद है लेकिन यदि किसी कारण सीधे चुनाव की स्थिति बनी तो उनकी चुनौती बढ़ सकती है।
देखने वाली बात होगी कि कृष्ण की इस धरती पर किस नेता के माथे पर जीत का सेहरा सजता है।