रामलला के जन्म की पृष्ठभूमि नैमिषारण्य से हेलीकॉप्टर पहली उड़ान प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या के लिए भरेगा। सतयुग की पौराणिक व आध्यात्मिक विरासत संजोए इस पावन धरा के स्वर्णिम इतिहास में नए साल से हवाई सफर की शुरुआत का नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। नैमिष में हेलीपोर्ट बनकर तैयार हो गया है। इसे दिसंबर के अंत तक पर्यटन विभाग को हैंडओवर करने की कवायद चल रही है।
सतयुग के सबसे पौराणिक तीर्थ नैमिषारण्य में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन करने आते हैं। यहां प्रवास कर तमाम श्रद्धालु श्रीमद्भागवत कथा व सत्य नारायण व्रत कथा का श्रवण भी करते हैं। 88 हजार ऋषि-मुनियों की इस पावन तपोभूमि को योगी सरकार वैदिक सिटी के रूप में विकसित करा रही है। नैमिष दर्शन को सुलभ बनाने के लिए इसे हवाई मार्ग से जोड़ने की योजना अब साकार होने जा रही है।
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यहां ठाकुरनगर-रुद्रावर्त धाम मार्ग के किनारे दो हेक्टेयर भूमि पर लगभग नौ करोड़ रुपये की लागत से हेलीपोर्ट बनकर तैयार है। नैमिष में एक साथ तीन हेलीकॉप्टर उतारने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए हेलीपोर्ट पर तीन हेलीपैड बनाए गए हैं। दिसबंर के अंत तक हेलीपोर्ट पर्यटन विभाग को हैंडओवर कर दिया जाएगा।
पर्यटन विभाग ने जनवरी 2025 में हेलीपोर्ट के उद्घाटन की कवायद शुरू कर दी है। नैमिष से हेलीकॉप्टर अयोध्या के लिए पहली उड़ान भरेगा। प्रयागराज और वाराणसी इत्यादि धार्मिक स्थलों से भी नैमिष को हवाई मार्ग से जोड़ा जाएगा। गोमती की लहरों के ऊपर से हेलीकॉप्टर उड़ान भरते हुए तीर्थ यात्रियों को चंद मिनटों में विभिन्न धार्मिक नगरों तक पहुंचा देगा।
टिकट की होगी एडवांस बुकिंग
हेलीपैड से जो भी हेलीकॉप्टर उड़ान भरेंगे, वे पांच या सात सीटर होंगे। हवाई सफर के लिए टिकट की एडवांस बुकिंग होगी। लखनऊ की कंपनी उड़ान का समय निश्चित करेगी। तय समय पर नैमिष से हेलीकॉप्टर उड़ान भरेगा। बाहर से नैमिष पहुंचने वाले हेलीकॉप्टरों पर भी यही प्रक्रिया लागू होगी।
हेलीपोर्ट पर मिलेंगी ये सुविधाएं
हेलीपोर्ट में एक टर्मिनल बिल्डिंग बनाई गई है, जिसमें वीआईपी के बैठने के लिए एक रूम है। इसके अलावा एटीसी बिल्डिंग व हैंगर बिल्डिंग का निर्माण किया गया है, जिसमें पार्किंग स्थल बनाया जाएगा। चारों तरफ हरियाली के लिए पेड़ पौधे लगाए जाने हैं। पर्यटन ऑफिस, कैफे एरिया, टिकट काउंटर के अलावा मुख्य मार्ग से हैलीपैड तक सीसी रोड बनाई गई है। इस मार्ग के दोनों तरफ लाइटें लगाई गई हैं।
रामलला के जन्म की पृष्ठभूमि है नैमिषारण्य
सतयुग में मनु-सतरूपा ने नैमिष में 23 हजार वर्षों तक कठिन तपस्या की थी। उनके तप से प्रसन्न होकर भगवान श्रीहरि ने उन्हें दर्शन दिए थे। मनु-सतरूपा ने भगवान श्रीहरि को पुत्र रूप में पाने का वरदान मांगा, इस पर श्रीहरि ने त्रेता युग में रामावतार लेने का वरदान उन्हें दिया था। त्रेता में मनु राजा दशरथ व सतरूपा रानी कौशल्या के रूप में जन्मीं और रामलला ने उनके पुत्र के रूप में जन्म लिया था। इस कथा का संपूर्ण वर्णन गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस के बालकांड में मिलता है।
इसी माह हैंडओवर कर देंगे हेलीपोर्ट
पर्यटन निगम के सहायक अभियंता आशुतोष मिश्र का कहना है कि हेलीपोर्ट बनकर तैयार है। तीन हैलीपैड बनाए गए हैं। थोड़ा फिनिशिंग कार्य बचा है। दिसंबर के आखिर तक हेलीपोर्ट पर्यटन विभाग को सौंप देंगे। जनवरी में इसके उद्घाटन की योजना है। नैमिषारण्य से अयोध्या रामलला के दर्शन के लिए हेलीकॉटर पहली उड़ान भरेगा।