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सेहत के लिए नई रणनीति: प्रदेश के पांच हिस्से कर सुधारेंगे स्वास्थ्य व्यवस्था, अस्पतालों का तैयार होगा डाटा

Tue, 01 Nov 2022 08:25 AM IST
शाहरुख खान चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ

सार

प्रदेश के कई अस्पतालों में सर्जरी के लिए वेटिंग है तो कई अस्पतालों में नाम मात्र के मरीज पहुंच रहे हैं। इसी तरह चिकित्सा संस्थानों में सामान्य सर्जरी सहित अन्य प्रक्रिया के मरीजों के पहुंचने की वजह से डॉक्टर गंभीर मरीजों पर फोकस नहीं कर पा रहे हैं। 
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(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने की नई रणनीति अपनाई गई है। इसके तहत जहां सर्जरी सहित अन्य प्रक्रिया के मरीजों की संख्या कम है, उसकी वजह तलाशी जाएगी। इस रणनीति से चिकित्सा संस्थानों में मरीजों का दवाब भी कम किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश के 18 मंडल को पांच हिस्से में बांटा गया है। इनकी निगरानी के लिए पांच संयुक्त निदेशक को जिम्मेदारी दी गई है।
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प्रदेश के कई अस्पतालों में सर्जरी के लिए वेटिंग है तो कई अस्पतालों में नाम मात्र के मरीज पहुंच रहे हैं। इसी तरह चिकित्सा संस्थानों में सामान्य सर्जरी सहित अन्य प्रक्रिया के मरीजों के पहुंचने की वजह से डॉक्टर गंभीर मरीजों पर फोकस नहीं कर पा रहे हैं। सप्ताहभर पहले केजीएमयू में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस पर नाराजगी जताई थी। 

उन्होंने मरीजों की स्थिति के अनुसार रेफर करने की सवाल दी थी। इस पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधिकारियों के साथ पूरी व्यवस्था को लेकर समीक्षा बैठक की। इसमें यवस्था सुधारने की रणनीति तैयार की गई। तय किया गया कि जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचने वाले मरीजों का आकलन किया जाएगा। 
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इसके लिए हेल्थ मैनेजमेंट इनफार्मेशन सिस्टम पोर्टल के डाटा का सहारा लिया जाएगा। इस डाटा के आधार पर हर दिन आने वाले मरीजों, सर्जरी, फीवर डेस्क रिपोर्ट का आकलन किया जाएगा। यह देखा जाएगा कि जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हर दिन पहुंचने वाले सर्जरी और फीवर के मरीजों की संख्या कितनी है? फिर यह देखा जाएगा कि जिस अस्पताल में सर्जरी केज्यादा मरीज पहुंचे हैं, वहां कितने डॉक्टर कार्यरत हैं और ऑपरेशन थियेटर, ओटी स्टॉफ आदि की व्यवस्था कितनी है? जहां मरीजों की संख्या कम है, वहां पर डॉक्टर व स्टॉफ आदि का भी आकलन होगा। 
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इसी तरह अन्य प्रमुख बीमारियों से जुड़े मरीजों के भार का भी आकलन किया जाएगा। दूसरी तरफ यह भी देखा जाएगा कि जिन अस्पतालों में संसाधन मौजूद हैं, वहां मरीजों की संख्या कम होने की क्या वजह है? इस पर हर दिन की स्थिति का आकलन करने के बाद मासिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। फिर उसी हिसाब में मैन पॉवर व संसाधन प्रबंधन किया जाएगा। जहां सर्जरी सहित अन्य प्रोसीजर कम हो रहे हैं, वहां के चिकित्साधिकारियों से बात कर व्यवस्था बढ़वाई जाएगी।

ये हैं मंडल प्रभारी
अस्पतालों की रिपोर्ट का आकलन करने के लिए संयुक्त निदेशक चिकित्सा उपचार डा. किरण मलिक को वाराणसी, कानपुर, लखनऊ मंडल की जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह संयुक्त निदेशक चिकित्सा उपचार डा. संतोष गुप्ता को झांसी, देवीपाटन, अयोध्या, गोरखपुर, राज्य कुष्ठ अधिकारी डा. जया देहलवी को मिर्जापुर, आगरा, अलीगढ़, प्रयागराज, संयुक्त निदेशक गोपन डा. योगेश करोली को आजमगढ़, बरेली, बस्ती, चित्रकूट और संयुक्त निदेशक अभिलेख दर्शन डा. उषा देवी गंगवार को मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल की जिम्मेदारी दी गई है।

क्या होगा फायदा
देश के किसी प्रदेश में पहली बार यह नया मॉडल अपनाया गया है। इससे सर्जरी सहित अन्य प्रोसीजर अधिक करने वाले और कम करने वाले अस्पतालों का डाटा तैयार किया जाएगा। जहां मरीजों की संख्या अधिक है, वहां संसाधन बढ़ाया जाएगा। जहां मरीजों की संख्या कम है, उसकी वजह तलाशकर संख्या बढ़वाई जाएगी। इससे अस्पतालों पर अनावश्यक दवाब नहीं रहेगा। मरीजों को इलाज के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसकी हर माह समीक्षा की जाएगी।
पार्थ सारथी सेन शर्मा, प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य
 
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