श्रावस्ती। जमुनहा की ग्राम पंचायत हरदत्त नगर गिरंट जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है। 56 मजरों वाली इस ग्राम पंचायत में 22 हजार की आबादी है। तय मानक पूरे करने के बावजूद अभी तक इस ग्राम पंचायत को नगर पंचायत का दर्जा नहीं मिला है। इससे गांव का चहुंमुखी विकास नहीं हो पाने से क्षेत्रीय लोगो में रोष व्याप्त है।
इस पंचायत का इतिहास बेगम हजरत महल से जुड़ा हुआ है। जिन्हें शरण देने वाले राजा हरदत्त सिंह को ग्रांट के रूप में मिली इस भूमि पर हरदत्त नगर गिरंट गांव बसाया था। यह गांव स्वतंत्रता संग्राम का साक्षी रहा है। देश के आजादी की लड़ाई के दौरान ही इस गांव का जन्म हुआ।
वर्ष 1857 में अंग्रेजों ने जब लखनऊ की रियासत पर कब्जा कर लिया तो बेगम हजरत महल ने बौंडी के राजा हरदत्त सिंह सह सवाई के यहां शरण लिया। इसकी जानकारी होने पर अंग्रेजों ने बौंडी रियासत पर हमला बोल दिया। जहां अंग्रेजों ने कई किले ध्वस्त कर दिए। राजा हरदत्त सिंह ने बेगम हजरत महल के साथ यहां से भाग कर नानपारा के नवाब शहादत अली के पास शरण लिया।
यहां से बेगम हजरत महल नेपाल चली गई। श्री कृष्ण आदर्श इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रेम कुमार यादव ने बताया कि नवाब ने राजा हरदत्त सिंह को सुरक्षित स्थान पर छिपने के लिए अनुदान (ग्रांट) में रियासत का कुछ जंगली हिस्सा दिया। धीरे-धीरे यहां गांव बस गया। जिसका नाम हरदत्त नगर ग्रंट पड़ा। बाद में गांव का नाम हरदत्त नगर गिरंट हो गया।
ग्राम पंचायत के अनुसार नहीं मिल रहा बजट
जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत का गौरव प्राप्त हरदत्त नगर गिरन्ट में 56 मजरे शामिल हैं। यहां पर साप्ताहिक बाजार लगने के साथ ही गांव में अस्थाई बाजार भी है। गिरंट में सुपारी काटने का सरौता व लोहे अन्य उपकरण तैयार किए जाते हैं। गांव निवासी राजेन्द्र कुमार विश्वकर्मा बताते है कि यहां का सरौता आसपास के कई जिलों में प्रसिद्ध है।
अंबिका प्रसाद यादव बताते है कि गांव के चारों ओर वन क्षेत्र होने के कारण यहां का माहौल काफी सुरम्य है। प्रकृति की गोद में स्थित इस गांव के लोगों को वन विभाग से भी अस्थाई रोजगार मिलता है। ग्राम प्रधान विजय कुमार ने बताया कि 56 मजरों वाली ग्राम पंचायत हरदत्त नगर गिरंट की कुल आबादी करीब 22500 है। यहां कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, दो इंटर कॉलेज, निर्माणाधीन आईटीआई, पॉलिटेक्निक, राजकीय डिग्री कॉलेज, प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय है। इसके बावजूद इस नगर पंचायत का दर्जा नहीं दिया जा रहा है।