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बांग्लादेशी डकैतों के वॉकी-टॉकी गिरोह का सरगना हमजा ही लिखता था डकैती की पटकथा

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लखनऊ। राजधानी की पॉश कॉलोनियों में डकैती डालने वाले बांग्लादेशी डकैतों के वॉकी-टॉकी गिरोह का सरगना हमजा रविवार देर रात मुठभेड़ में मारा गया। पुलिस के मुताबिक, वह लखनऊ से करीब 1500 किलोमीटर दूरी पर बैठकर वारदात की पूरी कहानी लिखता था। लखनऊ पुलिस उसे 2018 से तलाश रही थी। वह जितनी बार वारदात करने निकलता था, उतनी बार नए सदस्य गिरोह में शामिल करता था। उन्हें एक महीने का प्रशिक्षण भी देता था। कैसे वारदात करनी है? कैसे पुलिस से बचना है? किन बातों का ध्यान वारदात के समय रखना जरूरी है? ऐसे कई सूत्र अपने साथियों को बताता था।
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पुलिस के मुताबिक, हमजा के गिरोह के पकड़े गए सदस्यों से पूछताछ में कई बातें सामने आई हैं। इसमें मास्टरमाइंड हमजा अपने गिरोह में 18 से 30 साल के युवकों को साथ लेता था। खासकर ऐसे युवकों को वरीयता देता था जो शारीरिक रूप से काफी मजबूत हों, भागने-दौड़ने में तेज हों। प्रशिक्षण के दौरान कूदने, फांदने के साथ दीवार पर चढ़ने, भागने और ताला तोड़ने जैसी ट्रेनिंग शामिल थी। घर में घुसकर वहां रहने वालों को बिना शोर किए बंधक बनाना, घायल करने के लिए शरीर पर किस हिस्से में वार करना है, यह भी सिखाया जाता था। हमजा गैैंग वारदात के दौरान हत्या जैसी वारदात करने से बचता था। गैंग में शामिल युवाआें को रोजगार का लालच देता था। फिर अपराध की दुनिया में ले आता था। इसके लिए मोटी रकम का लालच देता था।
सरगना रखता था एक तिहाई माल
गिरोह के सदस्य वारदात को अंजाम देकर सारा माल लेकर तय स्थान पर पहुंचते थे। वहां हमजा सारे माल का बंटवारा करता था जिसमें गिरोह के सभी सदस्यों के हिस्से में करीब 70 प्रतिशत माल बांट देता था। बाकी 30 प्रतिशत अपने पास रख लेता था। हमजा ही वह शख्स है जो किसी भी शहर में वारदात का टारगेट सेट करता था। पुलिस के मुताबिक, हमजा व गैैंग का कोई सदस्य मोबाइल का प्रयोग वारदात के समय नहीं करता था लेकिन किसी अंजान शहर में टारगेट सेट करने के लिए वह गूगल मैप का सहारा लेता है। वह उन घरों को टारगेट करता था जहां से रेल लाइन निकल रही होती है। गिरोह वाहन का भी प्रयोग नहीं करता है। ये लोग ट्रेन से आते हैं और ट्रेन से ही दूसरे शहर में वारदात कर भाग जाते हैं। पुलिस के मुताबिक, 2018 और 2021 में जिन घरों में डकैती डाली गई, वहां से मिली जानकारी के अनुसार हमजा महंगी घड़ी, जूतों का शौकीन था। जिन घरों में वारदात करते हैं वहां अगर महंगी घड़ी मिलती तो उस पर हमजा का हक होता था। 2018 में एक मकान में उसने विदेशी घड़ी लूटी थी जिसकी कीमत करीब एक लाख रुपये थी।
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सीसीटीवी से बचते थे गिरोह के सदस्य
हमजा अपने साथियों को हमेशा इस बात की हिदायत देता था कि वह वारदात के समय आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के बारे में जानकारी हासिल कर लें। वारदात के समय उनकी जद में न आएं। जिस घर में सीसीटीवी कैमरे लगे होते थे तो वहां डीबीआर भी साथ लेकर चले जाते थे। गिरोह रात के 2 से 4 बजे के बीच वारदात करता था। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य वारदात के पहले देर रात की मूवी शहर केपॉश इलाकों के मॉल के मल्टीप्लेक्स में देखते थे। वहां से निकलने के बाद वारदात को अंजाम देते थे। पिछले करीब डेढ़ साल से कोविड के कारण मॉल बंद होने से इस गिरोह ने अपना तरीका बदल लिया था।
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