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सियासत की पिच पर भी चमक गये गुरु

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सीतापुर से मंत्री राकेश राठौर गुरू। - फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। कहते हैं कि सियासत में कुछ भी स्थाई नहीं होता। कब राजनीतिक सितारे अर्श से फर्श और फर्श से अर्श पर पहुंच जाएं, कहना जरा मुश्किल है। जी हां, कुछ ऐसी ही कहानी है 2022 के सत्ता संग्राम में भाजपा के लिए प्रतिष्ठापूर्ण सदर सीट से जीते नगर विधायक राकेश राठौर गुरु की। वह शुक्रवार को योगी सरकार 2.0 मेें मंत्रिपरिषद मेें शामिल होकर जिले की राजनीति में अपने सर नेम की तरह गुरु बनकर चमके हैं। योगी सरकार ने राकेश राठौर को राज्यमंत्री के पद से नवाज कर उनका कद और पद दोनोें बढ़ा दिया है। राज्यमंत्री बनने वाले राकेश राठौर की कहानी फि ल्मी पठकथा से कम नहीं है। उनका सफर संघर्षों से भरा रहा है। तो आइए आपको रूबरू कराते हैं मंत्री बनने तक की संघर्षों की कहानी।
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राकेश राठौर गुरु के काफी करीबी और संघर्ष के शुरुआती दिनों को करीब से देखने और जानने वाले शहर के सिविल लाइंस निवासी प्रमोद गुप्ता पिंकू की जुबानी बताते हैं उनकी कहानी। इसके लिए आपको ले चलते हैं कि उनके अतीत में। बात आज से करीब 40 साल पहले की है। मूल रूप से मिश्रिख के निवासी राके श राठौर गुरु 40 साल पहले सीतापुर आ गए थे। यहां पर इन्होंने आरएमपी मोड़ के पास लकड़ी की गुमटी से स्कूटर मिस्त्री की शुरुआत की थी। करीब 10 साल तक स्कूटर बनाने के बाद इन्होंने शहर कोतवाली के पास बैटरी की दुकान खोली। स्कूटर बनाने के साथ बैटरी का कारोबार खूब चमका।
वह अपने कारोबार को और चमकाने में लगे थे। इसी बीच 8 जनवरी को विधानसभा चुनाव का बिगुल बज गया। फिर क्या था, भाजपा से टिकट पाने को लेकर कड़ाके की ठंड में राजनीतिक पारा चढ़ गया। सबसे ज्यादा सदर विधानसभा सीट को लेकर सरगर्मियां बढ़ी हुईं थीं। टिकट को लेकर चुनावी दंगल में कूदने को हर कोई आतुर था, लेकिन स्वभाव, व्यवहार और सादगी के साथ किस्मत के धनी बैटरी वाले राकेश राठौर गुरु भाजपा से टिकट पाकर चुनावी अखाड़े में उतर गए। सत्ता संग्राम में अन्य प्रत्याशियों से इतर मतदाताओं का समर्थन जुटाने के लिए सौम्य स्वभाव का परिचय दिया। नतीजा ये हुआ कि 10 मार्च को आए जनादेश में वह सपा के चार बार के विधायक रहे राधेश्याम जायसवाल को हराकर 1253 वोटों से जीत कर हर किसी को चौंका दिया। अब एक बार राकेश राठौर ने मंत्री बनकर सबको चौंकाने का काम किया है। जिले की सियासी फिजाओं में इसकी चर्चाएं तेजी से तैर रहीं हैं।
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2018 में ही कुछ बनने की ली थी ठान
योगी सरकार में मंत्री बने सदर विधायक राकेश राठौर से जुड़े लोगों की माने तो 2017 में सदर विधानसभा क्षेत्र से जीते राकेश राठौर के राकेश राठौर गुरु अच्छे दोस्त हुआ करते थे। दोनों में दांत काटे की दोस्ती थी, लेकिन कुछ दिनों के बाद ऐसे हालात बने कि बैटरी वाले राकेश राठौर गुरु ने अपने दोस्त विधायक राकेश राठौर से किनारा कर लिया। सूत्रों की माने तो 2018 में ही उन्होंने ये ठान लिया था कि वह कुछ बनकर दिखाएंगे। हालांकि, क्या बनेंगे, इसका खुलासा उन्होंने तब नहीं किया था, लेकिन शायद अब पता चल रहा है कि शायद उन्होंने यही ठाना था।
कैसे बन गए गुरु
मंत्री बने राकेश राठौर का वैसे पूरा नाम तो यही है, लेकिन शुरुआती दिनों में जब उन्होंने स्कूटर बनाने का काम श्ुारू किया था तो उनके साथ कई चेले काम करते थे। नाम न लेकर उन्हीं लोगों ने गुरू के नाम से उपाधि दे दी। वही नाम अब राजनीति में गुरु बनकर जिले की सियासत में चमका है। राकेश राठौर ने जिनसे स्कू टर बनाना सीखा था, वह भी उन्हें गुरु ही कहते थे। दरअसल, राकेश राठौर गुरु ने शिक्षा राजकीय इंटर कॉलेज से ली है। वह कक्षा आठ तक पढ़े हैं।
हर कदम पर रहीं चुनौतियां
स्कूटर मिस्त्री से लेकर बैटरी और अब इनवर्टर का काम करने में चुनौतियाें का सामना करने के साथ टिकट मिलने के बाद विरोधियों को अपने गुरु दांव से चित कर अपनों को मनाना भी उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन यह सब उन्होंने अपने सौम्य स्वभाव और सादगी से कर दिखाया।
मंत्री बनते ही आवास पर पुलिस का पहरा
शुक्रवार को मंत्री पद मिलते ही सदर विधायक राकेश राठौर गुरु के शहर के दुर्गापुरवा स्थित आवास पर पुलिस का पहरा बिठा दिया गया। एसपी के आदेश पर शहर कोतवाली से पुलिस तैनात कर दी गई। वहीं, इससे पहले 10 मार्च को विधायक बनने के बाद उनके घर तक सड़क रातोंरात बना दी गई थी। इसकी भी खूब चर्चा हुई थी।
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