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जीएसटी परिषद की बैठक : पेट्रोल-डीजल की मंहगाई से राहत नहीं, जीवनरक्षक दवाएं होंगी सस्ती

Fri, 17 Sep 2021 10:15 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

वित्त मंत्री ने बताया कि दो वर्ष काउंसिल की बैठक सदस्यों की भौतिक उपस्थिति में बहुत अच्छे माहौल में हुई और कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। उन्होंने बताया कि केरल हाईकोर्ट के आदेश के मद्देनजर पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार हुआ।
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जीएसटी परिषद की 45वीं बैठक में शामिल वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पेट्रोल व डीजल की महंगाई से अभी राहत मिलने वाली नहीं है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को यहां संपन्न वस्तु एवं सेवा कर परिषद (जीएसटी काउंसिल) की बैठक में पेट्रोल व डीजल को जीएसटी में शामिल करने पर विचार किया गया, लेकिन इस पर सहमति नहीं बनी। हालांकि, काउंसिल ने आम लोगों को राहत देने वाले भी कुछ फैसले किए हैं। कई महंगी जीवनरक्षक दवाओं को जीएसटी से मुक्त कर दिया गया हैं। साथ ही कोविड से जुड़ी दवाओं पर जीएसटी की रियायत 31 दिसंबर तक बढ़ा दी गई है। निर्यात के लिए जीएसटी इनपुट क्रेडिट साल के अंत तक जारी रहेगी।

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काउंसिल की बैठक के बाद वित्त मंत्री ने एक प्रेस कांफ्रेंस में लिए गए निर्णयों की जानकारी दी। वित्त मंत्री ने बताया कि दो वर्ष काउंसिल की बैठक सदस्यों की भौतिक उपस्थिति में बहुत अच्छे माहौल में हुई और कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। उन्होंने बताया कि केरल हाईकोर्ट के आदेश के मद्देनजर पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार हुआ। बहुमत सदस्य इसके खिलाफ थे। चर्चा में आमराय बनी कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में शामिल करने का अभी समय नहीं आया है। उन्होंने बताया कि  निर्णय की जानकारी केरल हाईकोर्ट को दी जाएगी।

वित्त मंत्री ने बताया कि कोरोना की दवाओं में रेमडेसिविर, एम्फोटेरेसिन-बी, टोसिलिजुमैब व हिपेरिन पर जीएसटी की रियायत 31 दिसंबर तक जारी रहेगी। हालांकि कोरोना से जुड़े उपकरणों पर अब रियायत नहीं रहेगी। रियायत की समयसीमा इसी 30 सितंबर को खत्म हो रही थी। एम्फोटेरेसिन-बी व टोसिलिजुमैब पर जीएसटी नहीं लग रहा है जबकि रेमडेसिविर व हिपेरिन पर 5 प्रतिशत जीएसटी लग रही है। इसी तरह कोविड से जुड़ी सात अन्य दवाओं इटोलीजुनैब, पोसोकॉनाजॉल, इन्फिल्क्सीमैब, फैवीपिराविर, कैसिरिविमैब एंड इम्डीविमैब, 2-डॉक्सी-डी-ग्लूकोज, बैम्लेनिविमैब एंड एटिसिविमैब पर जीएसटी से पांच प्रतिशत की रियायत दी गई है।

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फूड डिलिवरी पर अतिरिक्त टैक्स नहीं

वित्त मंत्री ने कहा कि फू ड डिलिवरी ऐप स्वैगी आदि से खाना मंगाने पर अतिरिक्त टैक्स लगाने की कोई बात नहीं है। ये ऐप वही टैक्स वसूलेंगे जो रेस्टोरेंट कारोबार पर लगता है। उन्होंने बताया कि इस सेवा से मिलने वाले टैक्स प्रापर तरीके से सरकार को मिले, इसके प्रावधान किए गए हैं।

कई लाइफसेविंग व कैंसररोधी दवाएं जीएसटी मुक्त
वित्त मंत्री ने बताया कि महंगी लाइफ सेविंग दवाओं को जीएसटी से मुक्त कर दिया गया है। इनमें दो काफ ी महंगी दवाएं हैं। बच्चों की दवाएं जोलगेंस्मा और विल्टेप्सी पर अब जीएसटी नहीं लगेगी। कैंसर की दवा कीट्रूडा पर जीएसटी की दर 12 प्रतिशत की जगह 5 प्रतिशत लगेगा। इसी तरह दिव्यांगों वाले उपकरणों पर जीएसटी दर 5 फीसदी हो जाएगी।

बायोडीजल, फोर्टिफाइड चावल पर जीएसटी घटा, पेन पर बढ़ा
बायोडीजल पर जीएसटी घटाकर 12 से 5 फसदी कर दिया गया है। इसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकारी राशन वितरण कार्यक्रमों में फोर्टिफाइड चावल वितरित करने का एलान किया है। यह व्यवस्था 15 अगस्त, 2022 से प्रस्तावित है। काउंसिल ने फोर्टिफाइड चावल पर जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। इसके अलावा सभी तरह के पेन पर अब जीएसटी 18 फ ीसदी रहेगी। पहले कुछ पर 12 व कुछ पर 18 फीसदी थी। इसे तर्कसंगत बनाने का हवाला देते हुए 18 प्रतिशत कर दिया गया है। माल वाहनों के नेशनल परमिट फ ीस को जीएसटी से मुक्त कर दिया गया है।

28 राज्यों व तीन केंद्रशाति प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में सुबह 11 बजे शुरू होने वाली इस बैठक में 28 राज्यों और 3 केंद्र शासित राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस बैठक में 50 से ज्यादा वस्तुओं एवं सेवाओं पर दरों में बदलाव पर विचार हुआ।

राज्यों को 2022 के बाद राजस्व घाटे की भरपाई नहीं
बैठक में जीएसटी लागू होने से राज्यों को हो रहे नुकसान की भरपाई के मुद्दे पर भी विचार हुआ। वित्तमंत्री ने बताया कि1 जुलाई 2017 को लागू जीएसटी एक्ट में कहा गया था कि जीएसटी लागू होने के बाद यदि राज्यों के जीएसटी में 14 फ ीसदी से कम ग्रोथ होती है तो उन्हें अगले पांच साल तक इस नुकसान की भरपाई ऑटोमोबिल और टोबैको जैसे कई उत्पादों पर विशेष सेस लगाकर करने की इजाजत होगी। यह पांच साल की अवधधि 2022 में पूरी हो रही है। उन्होंने बताया कि मार्च, 2026 तक सेस की वसूली से राज्यों द्वारा कोविडकाल में लिए गए कर्ज व ब्याज की भरपाई पर ही खर्च किया जाएगा। 
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