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जीएसटी काउंसिल ने कारोबारियों की उम्मीदों पर पानी फेरा, किसी भी समस्या का नहीं किया निराकरण

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जीएसटी काउंसिल की बैठक में कारोबारियों को नहीं मिली राहत। (फोटो ः प्रतीकात्मक) - फोटो : ??? ?????
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जीएसटी काउंसिल ने राजधानी में आयोजित बैठक में कारोबारियों की किसी भी समस्या का निराकरण नहीं किया।
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कारोबारियों को उम्मीद थी कि शून्य कारोबार पर लगने वाली पेनाल्टी एवं प्रक्रिया को सरल बनाने की पहली होगी। मगर, जीएसटी काउंसिल ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
उत्तर प्रदेश सीमेंट व्यापार संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्याम मूर्ति गुप्ता ने कहा कि एक साल से सीमेंट की 28 फीसदी दर को कम करने के लिए ज्ञापन दे रहे थे।
इस बार उम्मीद थी कि लखनऊ की बैठक में कुछ राहत मिलेगी तो सीमेंट सस्ती होगी पर कुछ नहीं किया। स्टेशनरी विक्रेता एवं निर्माता एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि पेन पर 12 फीसदी के जीएसटी को बढ़ाकर 18 फीसदी कर दिया गया।
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इससे बच्चों को महंगा पेन खरीदना होगा। व्यापार मंडल पदाधिकारी ज्योति सिंह ने कहा कि पहली बार ऐसा हुआ कि जीएसटी काउंसिल की बैठक हुई और कारोबारियों को कोई राहत नहीं मिल सकी। इससे कारोबारियों में आक्रोश है।
रिफंड की नहीं की बात
लखनऊ व्यापार मंडल के वरिष्ठ महामंत्री अमरनाथ मिश्र ने कहा कि जीएसटी काउंसिल ने कारोबारियों के रिफंड पर कोई बात ही नहीं की। आयात व निर्यात पर चुकता टैक्स जीएसटी पोर्टल पर ऑटो जनरेट इनपुट क्रेडिट टैक्स नहीं होती। इससे कारोबारियों को क्रेडिट टैक्स वापस लेने में परेशानी हो रही। यानी जीएसटी की मूल भावना ऑनलाइन नहीं हो पा रही।
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जीएसटी खत्म होने से तिलहन सस्ता होता
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश वरिष्ठ महामंत्री ज्ञानेश मिश्रा ने कहा कि तिलहन व तेल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए पांच फीसदी जीएसटी को खत्म करना चाहिए था। इससे तिलहन व तेल सस्ता होता तो जनता को राहत मिलती। पेट्रोल व डीजल को जीएसटी दायरे में लाने की मांग जारी रहेगी।
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