अधिकतर नमूनों को जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भिजवाया जा चुका है और ज्यादातर की रिपोर्ट भी आ चुकी है। अनुभाग के अधीन 13 में से आठ स्टेशन के 48 केस अब भी लंबित हैं। यह विसरा तीन से छह माह पुराने बताए जा रहे हैं। इन नमूनों को अब तक फॉरेंसिक लैब क्यों नहीं भेजा गया?
इसका जवाब किसी के पास नहीं है। एक अधिकारी ने बताया कि कुछ लापरवाही स्टेशन के स्टाफ के स्तर पर है तो स्टेशन और अनुभाग प्रभारियों के बीच तालमेल की कमी से भी विसरा पड़े-पड़े खराब हो रहे हैं।
फॉरेंसिक लैब में अटके हैं 150 से अधिक नमूने
जीआरपी के अधिकारियों ने बताया कि फॉरेंसिक लैब में विसरा की जांच तो दूर, कोई अधिकारी नमूने लेने को ही तैयार नहीं होता। अधिकारियों अथवा कोर्ट के हस्तक्षेप से अगर नमूने ले भी लिए गए तो उनकी जांच महीनों तक नहीं होती।
वर्तमान में लखनऊ जीआरपी के अंतर्गत आने वाले 13 स्टेशन के 150 से अधिक नमूने लैब में पडे़ हैं लेकिन जांच नहीं हो रही। जिनकी जांच हो भी गई है, उनकी रिपोर्ट अनुभाग अधिकारियों को नहीं मिल सकी है जिससे मुकदमों की सुनवाई और विवेचना प्रभावित हो रही है।
राजकीय रेलवे पुलिस लखनऊ के अधीन स्टेशन में मौतों के जो भी मामले हैं, उसमें 90 प्रतिशत ट्रेन से कटकर खुदकुशी अथवा हादसों के हैं। शेष 10 प्रतिशत केस जहरखुरानी, हत्या अथवा संदिग्ध हालात में हुई मौतों के हैं।
जीआरपी के अधिकारी बताते हैं कि ट्रेन में जहरखुरानी की घटनाएं बहुत होती हैं लेकिन इसके शिकार ज्यादातर लोगों का जीवन बचा लिया जाता है। यही वजह है कि जहरखुरानी से मौतों का आंकड़ा काफी कम है।
यहां पर लंबित हैं विसरा
चारबाग - 19
अकबरपुर - 06
सुल्तानपुर - 05
शाहजहांपुर - 05
रायबरेली - 04
बाराबंकी - 03
प्रतापगढ़ - 02
लखीमपुर - 02
हरदोई - 02
इन स्टेशन पर नो पेंडेंसी
फैजाबाद, उन्नाव, सीतापुर और पीलीभीत