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विदेशों से आएगा लखनऊ मेट्रो के लिए पैसा

Tue, 12 Nov 2013 02:11 AM IST
ऋषि मिश्र/लखनऊ
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मेट्रो रेल परियोजना के दोनों कॉरिडोर के लिए विदेशी एजेंसियों से करीब 7500 करोड़ रुपये का कर्ज जुटाने को शासन ने हरी झंडी दिखा दी।
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योजना भवन में सोमवार शाम प्रमुख सचिव नियोजन की अध्यक्षता में हुई बैठक में सर्व सम्मति से कर्ज लेने की संस्तुतियों को सहमति दे दी गई।

इसके बाद अब यह प्रस्ताव यूपी कैबिनेट से पास कराकर केंद्र को प्रेषित किया जाएगा, जिससे विदेशी बैंकों से करीब 7500 करोड़ रुपये का कर्ज लेने का रास्ता खुल जाएगा।

प्रमुख सचिव नियोजन संजीव मित्तल की ओर से इस आशय की मीटिंग बुलाई गई थी।

इसमें संबंधित विभागों के अधिकारियों के अलावा सचिव आवास और मेट्रो सेल के चेयरमैन राजीव अग्रवाल भी मौजूद रहे।

बैठक में बताया गया कि मेट्रो रेल परियोजना दो फेज में संचालित की जा रही है, जिस पर लगभग 12500 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

इसमें 20 फीसदी धन केंद्र और 20 फीसदी धन राज्य सरकार खर्च करेगी, जबकि बकाया 60 फीसदी रकम जो कि लगभग 7500 करोड़ रुपये होगी, उसकी व्यवस्था सरकार बतौर ऋण लेकर करेगी।
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पहले चरण में अमौसी से लेकर आलमबाग के बीच के स्ट्रेच के निर्माण को प्रदेश सरकार ने अपने धन से कराने का फैसला किया है।

इसके बाद कर्ज और केंद्र के हिस्से से काम आगे बढ़ाया जाएगा। इस संबंध में फिलहाल दो मुख्य एजेंसियों को लेकर सरकार की ओर से रुचि प्रदर्शित की गई है।

जापानी कंपनी जाइका और एशियन डवलपमेंट बैंक  (एडीबी) का प्रमुख रूप से उल्लेख किया गया है।

इनके अलावा कुछ संस्थाएं भी इसके लिए शामिल की जा सकती हैं। राजीव अग्रवाल ने बताया कि प्रमुख सचिव नियोजन की अध्यक्षता वाली कमेटी ने विदेशी कर्ज को लेकर अपनी सहमति दे दी है।

अब राज्य कैबिनेट इसे पास करेगा। जल्द ही केंद्र में राज्य सरकार का यह प्रस्ताव प्रेषित किया जाएगा। मेट्रो निर्माण के पहले टेंडर की प्रक्रिया का श्रीगणेश आज

डीएमआरसी को मेट्रो के निर्माण के टेंडर करने का हक देने के लिए मंगलवार को हाईपावर कमेटी की मीटिंग होगी।

इससे पहले डिजाइन कंसल्टेंट का चयन करने के लिए डीएमआरसी निविदा कर चुका है।

इसके बाद अब सिविल कार्य का लगभग 350-400 करोड़ रुपये का टेंडर करने के लिए डीएमआरसी को अधिकृत किया जाएगा।

मुख्य सचिव जावेद उस्मानी की अध्यक्षता में यह मीटिंग सचिवालय में शाम 5:00 बजे से शुरू होगी, जिसमें मुख्य रूप से सिविल कार्यों की टेंडर प्रक्रिया को पूरा करने की जिम्मेदारी डीएमआरसी को देने की शुरुआत की जाएगी।

राजधानी के लोगों को मेट्रो निर्माण के लिए होने वाली परेशानियों का सामना न करना पड़े, इसका खास ख्याल डीएमआरसी रखेगा।

23 किलोमीटर लंबे रूट को तीन खंडों में बांटकर प्रत्येक खंड पर 18-8 महीने सिविल वर्क चलेगा।

इससे जनता को कम संकट उठाना पड़ेगा। वहीं, कम रास्ते भी बदलने पड़ेंगे। यह काम लगभग तीन साल चलेगा।

सिविल वर्क खत्म होने के बाद में मैकेनिकल के काम शुरू होंगे। सबसे पहले डिपो और अमौसी से आलमबाग रूट पर निर्माण कार्य किए जाएंगे।

कंपनी निर्माण के बाद सबसे पहले सिविल वर्क शुरू किए जाएंगे। मेट्रो सेल के चेयरमैन राजीव अग्रवाल ने बताया कि पहले स्ट्रेच के लिए 350 से 400 करोड़ के बीच में टेंडर होगा।
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इसके लिए डीएमआरसी को अधिकृत करने के लिए हाईपावर कमेटी मंगलवार को फैसला करेगी।

काम को तीन खंड (स्ट्रेच) में बांटकर किया जाएगा। दिक्कतें सिविल वर्क में ही ज्यादा होंगी। इसलिए जरूरी है कि इस काम को टुकड़ों में बांटकर किया जाए।

तीन साल के भीतर पूरे रूट पर काम खत्म करने का लक्ष्य है, इसलिए 23 किमी के रूट को तीन टुकड़ों में बाटेंगे और इसी आधार पर काम शुरू किया जाएगा।

प्रत्येक खंड का सिविल वर्क पूरा होने में करीब 18 महीने का समय लगेगा।

ऐसे में 23 किमी का काम खत्म करने में 36 महीने का समय लगेगा। एक रूट पर सिविल काम खत्म होगा तो आगे के निर्माण शुरू होंगे।

दो लेखपाल और एक तहसीलदार मेट्रो में
मेट्रो के अधिग्रहण और भूमि पैमाइश जैसे कार्यों के लिए प्रशासन ने दो लेखपाल और एक तहसीलदार नियुक्त कर दिया है।

इसकी मांग मेट्रो सेल की ओर से की गई थी। इनके अलावा एक एडीएम की भी डिमांड की जा चुकी है। दरअसल, मेट्रो के लिए जो जमीनें अर्जित की जाएंगी, उसके लिए ये प्रशासनिक अफसर जरूरी हैं।

मेट्रो सेल के चेयरमैन राजीव अग्रवाल ने बताया कि एक तहसीलदार और दो लेखपाल की नियुक्ति का आदेश प्रशासन की ओर से कर दिया गया है।
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