एक साल में लगातार तेल चोरी पकड़े जाने के बाद कर्मचारियों पर कार्रवाई भी हुई। उनको नौकरी से निकाला गया, लेकिन वह बाज नहीं आ रहे हैं। इसको देखते हुए निगम प्रशासन ने बीते साल नया जीपीएस सिस्टम गाड़ियों में लगाने का आदेश किया था।
एक निजी कंपनी को यह काम दिया गया है, लेकिन तेल चोरी करने वालों के विरोध और उनकी मजबूत पहुंच के कारण यह काम पूरा ही नहीं हो पा रहा है। बीते करीब एक साल में नगर निगम की करीब 600 गाड़ियों में से महज 300 में ही जीपीएस सिस्टम लग पाया। जिससे तेल चोरी पर लगाम नहीं लग पा रही है।
नया जीपीएस सिस्टम लगाने का आदेश करते समय अफसरों ने दावा किया था कि अब यह भी पता चलेगा कि कितनी देर गाड़ी चली, कितने किलोमीटर चली। कितनी देर इंजन चालू रहा है और कितनी देर बंद रहा। नए सिस्टम में यह भी पता चलेगा कि कितनी देर गाड़ी स्टार्ट में खड़ी रही और कितनी देर इंजन बंद होने पर।
टंकी में कितना तेल भरा गया था उसमें से कितना खर्च हुआ और कितना बचा। उसकी ऑनलाइन जानकारी नगर निगम के कंट्रोल मॅानीटर पर आती रहेगी। जिससे तेल चोरी आसान नहीं रहेगी, लेकिन यह सब हवाई साबित हो रहा है।
जीपीएस लगने के बाद तेल चोरी का एक नया मामला पकड़ा गया था। इसमें कर्मचारी ने गाड़ी के वाइपर को हटाकर उसके मोटर का कनेक्शन स्पीडोमीटर से कर दिया था। इससे वाइपर ऑन करने पर स्पीडोमीटर चल रहा था।
सामने से वाइपर हटा दिए गए थे, इससे सामने से कुछ पता भी नहीं चलता था कि वाइपर का स्विच ऑन है। इसके जरिए चालक खुलेआम तेल चोरी कर रहा था, हालांकि अचानक गोपनीय शिकायत पर पकड़ा गया था।
जल्द पूरा होगा काम
तेल चोरी में पकड़े गए कर्मचारियों को हटा दिया गया है। जिन गाड़ियों में अभी जीपीएस नहीं लग पाया है उनमें उसे लगाने का काम जल्द पूरा कराया जाएगा। - इंद्रमणि त्रिपाठी, नगर आयुक्त