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यूपी सरकार के रवैये से जानलेवा हुआ डेंगू: हाईकोर्ट

Thu, 17 Nov 2016 02:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने डेंगू पर एक बार फिर सरकार को आड़े हाथों लिया। अदालत ने कहा कि प्रदेश सरकार ने डेंगू को महामारी तो घोषित कर दिया, लेकिन इसके लिए गजट नोटिफिकेशन तक जारी नहीं किया।
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जब नोटिफिकेशन नहीं होगा तो इन्हें अधिकारी कैसे मानेंगे और लागू करेंगे। सरकार के इसी रवैये ने डेंगू को इतने बड़े स्तर पर फैलने दिया, जिससे लोगों की जानें गईं। हाईकोर्ट ने दोषी पाए गए अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई न कर पाने पर भी नाराजगी जताई।

डेंगू से हुई सैकड़ों मौतों को लेकर दायर याचिका की सुनवाई के दौरान जस्टिस अमरेश्वर प्रताप साही और जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने बुधवार को यह तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आज के समय में नोटिफिकेशन छपवाना एक घंटे का काम है। सरकारी प्रेस भी लखनऊ में ही है।
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इसके बावजूद कैबिनेट के फैसले के आठ दिन बाद भी नोटिफिकेशन नहीं निकाला जा सका। इससे पता चलता है कि प्रदेश में प्रशासनिक विफलता के हालात हैं।

राजव्यवस्‍था में सरकारी अफसर काम करने में रहे विफल

याचिकाकर्ता सुरेश कुमार पांडेय के अधिवक्ता कुलदीपपति त्रिपाठी ने बताया कि मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने सरकार की ओर से उठाए गए कदमों पर हलफनामा दाखिल किया था। इसमें बताया गया था कि आठ नवंबर को प्रदेश कैबिनेट ने डेंगू को महामारी घोषित कर दिया है।

हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार ने जिस तरह से पूरे मामले में काम किया है, इससे हाईकोर्ट एक लोक प्रशासन कोर्ट बन गया है। यह राजव्यवस्था में सरकारी अधिकारियों के लिए निर्धारित कार्यों को कर पाने की विफलता भी दिखाता है। मामले की अगली सुनवाई पांच दिसंबर को होगी।

सरकार ने कहा- हमने कई अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की
हलफनामे में बताया गया कि डेंगू फैलने पर चिकित्सा विभाग ने लखनऊ के सीएमओ, डिप्टी सीएमओ और चिकित्सा विभाग के संयुक्त निदेशक सहित कई अधिकारियों पर एक्शन लिया है।

14 अधिकारियों को सेंसर एंट्री दी गई है, चार के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और चार रिटायर्ड अधिकारियों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है। एक अधिकारी को सस्पेंड और एक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य विभाग को कहा गया है। विभाग ने 98 सीएमओ और 67 सहायक सीएमओ को कारण बताओ नोटिस दिया है।

हाईकोर्ट ने कहा- सारी कार्रवाई दिखावटी, हर साल मरते हैं लोग

हाईकोर्ट ने सरकार के जवाब पर कड़े शब्दों में नाराजगी जताते हुए इस कार्रवाई को खानापूर्ति माना और कहा कि हर साल डेंगू फैलता है, बड़ी संख्या में नागरिक मरते हैं।

इसके लिए केंद्र सरकार से जो पैसा आता है, उसे भी अधिकारी खर्च नहीं कर पाते। ऐसे अधिकारियों पर जो कार्रवाई की जा रही है, वह बहुत हल्की, नाकाफी और दिखावटी है।

हलफनामे में एनजीओ की रिपोर्ट का जिक्र नहीं
डेंगू पर हाईकोर्ट में दी गई रिपोर्ट यूपी टेक्निकल सपोर्ट यूनिट ने बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन के तहत आने वाले एनजीओ मैसर्स पथ के साथ तैयार की है। इसे डीजी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य ने रिव्यू किया।

रिपोर्ट में स्वॉट (स्ट्रेंथ, वीकनेस, अपॉर्च्यूनिटी एंड थ्रेट्स) विश्लेषण दिया गया है। इसे मच्छरों की वजह से यूपी में होने वाली बीमारियों के परिप्रेक्ष्य में तैयार किया गया है। हाईकोर्ट ने कहा कि मुख्य सचिव के हलफनामे में इस रिपोर्ट का उल्लेख नहीं किया गया है।
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‘नए राजनीतिक नेतृत्व से फैला डेंगू...’

हाईकोर्ट ने टेक्निकल सपोर्ट यूनिट की ओर से पेश रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदेश में मच्छर जनित रोगों के फैलने में नया राजनीतिक नेतृत्व भी एक खतरा है। रिपोर्ट में लोगों के असंतोष और प्राकृतिक व मानवजनित आपदाओं को भी वजह बताया गया है। हाईकोर्ट ने इस रिपोर्ट में ‘नए राजनीतिक नेतृत्व -मच्छरजनित रोग कार्यक्रम को कम प्राथमिकता’ को दिलचस्प बताया।

सभी वार्ड में करें घर-घर कचरा संग्रहण
हाईकोर्ट ने कहा कि गंदगी भी डेंगू के बढ़ने की प्रमुख वजह है। नगर निगम का कहना है कि वह सफाई, कचरा प्रबंधन, फॉगिंग, एंटी लार्वा स्प्रे करवाता है। लखनऊ के 110 में से 69 वार्डों में वह घर-घर से कचरा संग्रहण करवा रहा है। हाईकोर्ट ने कहा कि उसे कचरा संग्रहण की यह सुविधा सभी 110 वार्डों में मुहैया करानी होगी।

शिवरी प्लांट पर मांगी रिपोर्ट
हलफनामे में कहा गया कि कचरा प्रबंधन कर रहे शिवरी प्लांट का अधिकतर हिस्सा काम कर रहा है, लेकिन यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ( यूपीपीसीबी) ने उस पर लापरवाहियों और अनियमितताओं के लिए कार्रवाई के लिए कहा है। ऐसे में हाईकोर्ट को प्लांट लगाने और इसके संचालन की स्पष्ट स्थिति जाननी होगी। इस पर हाईकोर्ट ने यूपीपीसीबी के सदस्य सचिव और वैज्ञानिक व इंजीनियर को प्लांट विजिट करने और रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
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