नौकरियां देने में अनियमितता मिलने पर शासन ने यूपी विज्ञान एवं प्राौद्योगिकी परिषद (यूपीसीएसटी) में संयुक्त निदेशक डॉ. हुमा मुस्तफा के खिलाफ कार्रवाई की है। संयुक्त निदेशक की पांच वेतन वृद्धि पर रोक लगा दी गई है। डॉ. मुस्तफा पर बीकेटी स्थित बायोटेक नेटवर्क फैसिलिटी सेंटर में जैव प्रौद्योगिकी लैब के संचालन के लिए नौकरियां देने में अनियमितता के आरोप लगे।
स्वास्थ्य विभाग के एक पूर्व अधिकारी की बेटी सहित कई अन्य को अनुचित लाभ देकर नौकरी दी गई। इसकी शिकायत होने पर महानिदेशक यूपीसीएसटी व प्रमुख सचिव विज्ञान व प्रौद्योगिकी कुमार कमलेश ने जांच के आदेश दिए थे। संयुक्त सचिव शासन कृपा शंकर सिंह ने जांच की रिपोर्ट छह दिसंबर 2019 को दे दी थी।
वहीं चार्जशीट के जवाब में डॉ. हुमा मुस्तफा ने कहा कि एमओयू उन्होंने नहीं किया था। वहीं, जांच के दौरान उनको जवाब देने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने इसको लेकर भी सवाल उठाए कि एक जूनियर उनकी जांच कैसे कर सकता है? डॉ. मुस्तफा ने जांच के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट ने गत 14 जुलाई को अनुशासनिक कार्यवाही में चार सप्ताह में निर्णय लेने का आदेश महानिदेशक को दिया था। महानिदेशक ने जांच रिपोर्ट को सही पाते हुए उनके खिलाफ अकर्मण्यता, लापरवाही, दायित्वहीनता तथा यूपीसीएसटी को वित्तीय हानि का दोषी पाते हुए दंड का आदेश कर दिया। इसमें परिनिंदा के साथ पांच वेतन वृद्धि पर रोक लगाई गई है। इसके साथ ही डॉ. मुस्तफा के खिलाफ अनुशासनिक कार्यवाही भी समाप्त कर दी गई है।