अभ्यर्थियों की दलील थी कि 2312 पद जो क्षैतिज आरक्षण में नहीं भरे जा सके उन्हें सामान्य कोटे से भरा जाए। भर्ती बोर्ड की दलील थी कि क्षैतिज आरक्षण में जो भर्ती रिक्त रह जाती है उसे अगली भर्ती प्रक्रिया में शामिल कर लिया जाता है।
न्यायालय ने भर्ती बोर्ड की बात नहीं मानी और 20 फरवरी 2019 को राज्य सरकार को आदेश दिया कि क्षैतिज आरक्षण में रह गई खामी को दूर करते हुए परिणाम घोषित किए जाएं। इसी क्रम में सोमवार को जब अभ्यर्थियों ने लखनऊ में प्रदर्शन किया तो आनन फानन में सरकार भी सक्रिय हुई और बोर्ड ने देर शाम 2088 अभ्यर्थियों की अंतिम सूची जारी कर दी।
प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि बीते वर्ष 2018 में भर्ती बोर्ड ने 2013 भर्ती के लगभग 13 हजार अभ्यर्थियों को मेडिकल परीक्षण के लिए बुलाया था। जिन छात्रों का मेडिकल कराया गया उसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि हम उक्त सभी को चयनित करें। आज प्रदर्शन करने आए अभ्यर्थियों में से पांच अभ्यर्थियों को बुलाकर उनका पक्ष जाना और इस पूरे मामले के पटाक्षेप का भरोसा दिलाया।