सरकारी कॉलोनियों में रहने वाले अफसरों एवं कर्मचारियों को रिटायरमेंट के वक्त सरकारी आवास छोड़ने से पहले बिजली बिल चुकाना होगा। क्योंकि बिना बिल चुकाए अब उन्हें सरकारी देनदारी का एनओसी नहीं मिलेगा।
इससे सेवानिवृत्ति पर मिलने वाले जीपीएफ, ग्रेच्युटी आदि देयक फंस सकते हैं। जो विभाग बिना बिजली बिल चुकाए ऐसे कर्मचारियों को एनओसी जारी कर देंगे उन्हें खुद बाकी बिल भरना पड़ेगा।
यह नई व्यवस्था मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने तत्काल प्रभाव से लागू कर दी है। इसके तहत सरकारी विभाग किसी भी आवंटी को एनओसी जारी करने से पहले उसे आवंटित आवास पर बकाया बिजली बिल की जानकारी लेसा से जुटाएंगे।
आवंटी पर बिजली बिल बकाया मिलता है तो उसे एनओसी नहीं मिलेगा। लेकिन आवंटी के बिल का भुगतान होने पर लेसा संबंधित विभागों को एनओसी जारी करने की अनुमति दे देगा। इस व्यवस्था से सरकारी कॉलोनी के आवंटी को आवास छोड़ने से पहले बकाया बिजली बिल का भुगतान करना होगा।
बिल चुकाए बिना ही रफूचक्कर
लेसा के विद्युत नगरीय वितरण खंड राजभवन खंड के द्वारा राज्य संपत्ति एवं लोक निर्माण विभाग को पत्र लिखकर अनुरोध किया गया कि जो सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारी रिटायर होने पर आवास खाली करें तो उनको एनओसी देने से पहले परमीशन ली जाए। इस परमीशन में लेसा के द्वारा बाकी बिजली बिल ब्योरा दिया जाएगा।
लखनऊ की बटलर पैलेस, डालीबाग, पार्क रोड विधायक निवास, दारुलशफा, बहुखंडीय मंत्री आवास, सचिवालय कॉलोनी, गुलिस्ता कॉलोनी, टिकैत राय तालाब कॉलोनी आदि में सरकारी मकान का आवंटन कराकर 10-10 एवं 20-20 साल तक निवास करने वाले बिना बिजली बिल चुकाए मकान छोड़कर चले गए। इससे लेसा को करोड़ों रुपये की चोट पहुंची है।
अब राज्य संपत्ति एवं लोक निर्माण सहित अन्य विभागों की सरकारी कॉलोनी में रहने वाले आवंटी को आवास छोड़ने से पहले अपडेट जमा बिजली बिल की रसीद देखकर ही एनओसी देना होगा। नहीं तो सरकारी विभागोें को बकाया बिल चुकाना होगा। - संजय गोयल, प्रबंध निदेशक मध्यांचल विद्युत वितरण निगम