प्रदेश के अफसर सरकार की किरकिरी कराने का कोई भी मौका जाने नहीं देना चाहते। पिछले साल बाढ़ से प्रदेश को बड़ा नुकसान हुआ था। प्रदेश सरकार ने मदद के लिए केंद्र से 3200 करोड़ रुपये मांगे।
केंद्र ने नियम को दरकिनार कर सहायता मांगने के आधार पर एक फूटी कौड़ी नहीं दी। सरकार की खूब किरकिरी हुई।
इधर एक महीने पहले केंद्र ने देश के सूखा प्रभावित जिलों के किसानों की मदद के लिए डीजल पर 50 प्रतिशत छूट देने का ऐलान किया।
केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री ने प्रदेश से मदद मांगने पर हरसंभव सहायता देने की बात कही। पर, प्रदेश के हुक्मरान शायद पुरानी गलती से सबक लेने को तैयार नहीं हैं।
जिलों को सूखा प्रभावित घोषित न करने से अब तक डीजल पर छूट न पाने से किसान सरकार को कोस रहे। अब बिना सूखा प्रभावित जिला घोषित किए केंद्र से मदद मांगने की भी कार्यवाही चल रही है।
एक बड़े अफसर कहते हैं कि बिना सूखे का ऐलान किए क्या सूखे में मिलने वाली मदद मिल सकती है? ऐसी गलती की तो फिर नहीं मिलेगा कुछ।
फिर अंदाजा लगाइए विपक्षी सरकार की क्या गत बनाएंगे? मंत्री पहले से ही कहते घूम रहे हैं कि राज्य केंद्र से पैसा लाता ही नहीं।