लोगों को काफी बुरा लगता है। पर, अध्यक्षजी भी क्या करें?
डॉक्टरी पढ़ी है तो जानते हैं कि रोग का इलाज कैसे करना है और कड़वी से कड़वी दवा कैसे पिलानी है।
फिर अब तो देश पर अपना शासन भी है। सो अपने कार्यालय पर एक नोटिस चिपकवा दिया, जिस पर कार्यकर्ताओं से मिलने का टाइम भी लिखवा दिया है।
आने वालों को पर्ची पर मिलने का मकसद भी लिखना होता है। इससे ऐसे नेता परेशान हैं जो उनसे मिलकर कुछ खास बताना चाहते हैं। बेचारे!
मिलने जाएं तो पहले पर्ची पर लिखें उसकी वजह। जब तक जुबानी मामला था, तब तक तो मामला फंसने पर पल्ला झाड़ लेते थे, पर अब ऐसा हो नहीं सकता। लिहाजा खुद ही दूरी बना ली है।
उधर, अध्यक्षजी की मंडली खुश है कि चलो बेवजह की भीड़ से फुरसत मिली। पर, वे लोग चिंतित हैं जिन्हें कार्यकर्ताओं की दूरी से पार्टी के लिए संकट लग रहा है, सो कह रहे हैं कि यह दवा कहीं दर्द का सबब न बन जाए।