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20 साल में सूख जाएगी लखनऊ की गोमती नदी?

Fri, 24 Jul 2015 04:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ
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लोगों की प्यास बुझाने के लिए नए ट्यूबवेल लगाकर हो रहे भूगर्भ जल के अंधाधुंध दोहन ने गोमतीनदी पर ही संकट पैदा कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भूगर्भ जल पर निर्भर गोमती नदी तेजी से गिर रहे लेवल के चलते आने वाले 15-20 साल में संकट में आ जाएगी।
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सबसे बड़ा खतरा गोमती नदी को पानी नहीं मिलने से इसके सूखने के रूप में सामने आएगा। यह खुलासा बुधवार को भूगर्भ जल विभाग के जल दोहन के आंकड़ों में सामने आया।

भूगर्भ जल विभाग की प्री-मानसून रिपोर्ट के मुताबिक केवल एक दशक में सरकारी ट्यूबवेल की संख्या 2005 में 300 से बढ़कर 2015 में 672 पर पहुंच गई है। 1975 में यह आंकड़ा केवल 45 था जोकि 1985 में बढ़कर केवल 70 पर पहुंचा था।
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ट्यूबवेल बढ़ने के अनुपात में जमीन से पानी निकालने का अनुपात भी बढ़ गया। 2005 में भूगर्भ जल दोहन की मात्रा केवल 190 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) थी। 2015 में यह मात्रा अब बढ़कर 395 एमएलडी हो गई है, जो एक दशक में दो गुना है।

1975 में केवल 50 एमएलडी पानी जमीन से निकाला जाता था, जो 1985 में 70 एमएलडी तक पहुंच गया। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर शहर की जलापूर्ति की निर्भरता भूगर्भ जल पर होने की वजह से है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्यूबवेल बढ़ने से जहां दोहन बढ़ा है,वहीं इससे ट्यूबवेल की पानी निकालने की क्षमता भी कम हुई है।

लगातार फेल हो रहे हैं ट्यूबवेल

2005 तक यह क्षमता 1200-1500 एलपीएम थी। यह क्षमता अब घटकर केवल 600-1100 एलपीएम हो गई है। क्षमता घटने की वजह से ट्यूबवेल फेल होने की शिकायतें भी बढ़ी हैं।

इसके बाद भी लगातार नए ट्यूबवेल लगाए जा रहे हैं। एक अनाधिकृत स्त्रोत के मुताबिक सरकारी आंकड़ों से अलग करीब 10,000 ट्यूबवेल शहर में निजी उपयोग के लिए लगाए हुए हैं। इससे हालात और ज्यादा खराब हो रहे हैं।

गोमती,भूगर्भ जल एक-दूसरे के पूरक पर्यावरणविद् और पूर्व भूविज्ञानी डॉ. वीके जोशी का कहना है कि गोमती नदी की संरचना दूसरी नदियों से अलग है। यह पूरी तरह भूगर्भ जल से रिचार्ज होने वाली नदी है।

भूगर्भ जल से रिचार्ज होकर यह दुबारा उसे रिचार्ज भी करती है। ऐसे में दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। अगर भूगर्भ जल गिरेगा तो गोमती रिचार्ज नहीं होगी। ऐसे में गोमती नदी के सूखने का संकट होगा। यह 20-25 साल में संभव है। गोमती नदी के रिचार्ज के स्त्रोत गोमतीनगर क्षेत्र को हम पहले ही शहरीकरण और अंबेडकर पार्क जैसे निर्माण से बर्बाद कर चुके हैं।
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35 मीटर से नीचे पहुंच रहा पानी

भूगर्भ जल विभाग में हाइड्रोलॉजिस्ट डॉ.एनसी सक्सेना का कहना है कि पानी का अंधाधुंध दोहन होने से पहली लेयर का पानी खत्म होने का संकट पैदा हो गया है। पोस्ट-मानसून में भी खराब स्थिति मिल रही है। ऐसे में खतरा ज्यादा बढ़ गया है।

डॉ.जोशी का शासन को सीधा सुझाव है कि अगर राजधानी को उजड़ने से बचाना है तो सख्ती से शहर के अंदर के ट्यूबवेल बंद कराने होंगे।

अगर जलापूर्ति के लिए भूगर्भ जल पर निर्भरता है। ऐसे में शहर की सीमा से करीब 25 किमी दूर ट्यूबवेल खोदे जाएं। यहां से पाइप से पानी की आपूर्ति शहर के जलसंस्थानों को हो। इसके बाद ही राजधानी को पानी दिया जाए। इससे गोमतीनदी और शहर का भूगर्भ जल हम बचा पाएंगे।
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