गोमती रिवरफ्रंट विकास योजना में ठेकेदारों को मनमाने तरीके से भुगतान हुए। आलम यह है कि 1500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने के बाद भी 60 फीसदी ही काम हो पाया। वहीं करीब 90 फीसदी बजट का भुगतान ठेकेदारों को किया जा चुका है। इसके बाद भी मौके पर हालात यह है कि अधूरे काम शोपीस बने हुए हैं। करीब 60 करोड़ रुपये का फाउंटेन कंटेनरों से बाहर नहीं निकला। 80 से अधिक हाईमास्ट लाइटें बिजली कनेक्शन न होने के कारण बंद पड़ी हैं। टॉयलेट कांप्लेक्स, एसी बोट बस के उपयोग ही नहीं हो पाए।
सीबीआई जांच शुरू हुई तो सिंचाई विभाग ने विकास कार्य भी पूरे नहीं कराए। रबर डैम से लेकर कई जगह डायफ्रॉम वॉल, ड्रेनेज सिस्टम के काम अधूरे छोड़ दिए गए। शासन के निर्देश पर एलडीए ने रिवरफ्रंट पर पार्कों का जरूर विकसित कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि करीब 8.5 किमी नदी के दोनों तरफ डायफ्रॉम वॉल बनाई गई। इसके बाद नदी क्षेत्र में बची जमीन को ग्रीनबेल्ट के रूप में विकसित करने का काम होना था।
सिंचाई विभाग से इस काम को लेकर उद्यान से जुड़े काम एलडीए को दे दिए गए। सिविल वर्क और बिजली से जुड़े काम सिंचाई विभाग के पास अब भी हैं। पूरे प्रोजेक्ट की जांच जब शुरू हुई तो सिंचाई विभाग के काम करने पर रोक लग गई। ऐसे में इसके सौंदर्यीकरण के कई काम फंस गए। इनमें म्यूजिकल फाउंटेन, मैरिज लॉन, सीवर लाइन, पंपिंग स्टेशन, रबर डैम आदि शामिल हैं।
शौचालयों तक में लटके ताले
रिवरफ्रंट स्टेडियम के पास बने शौचालयों तक को उपयोग में नहीं लाया गया है। इन पर ताले लटके हैं। स्टेडियम को बदहाली में छोड़ दिया गया है। पास मौजूद मैरिज लॉन भी शुरू नहीं हो सका है। भैंसकुंड, गोमती बैराज के पास काम अधूरा होने से लोगों के आने-जाने तक का रास्ता बंद पड़ा हुआ है।