सर्वप्रथम प्रदेश के पश्चिमांचल के 25 प्रभावित जनपदों के लंपी प्रभावित क्षेत्रों में रिंग वैक्सीनेशन का कार्य प्रारम्भ किया गया। रोग का प्रसार पश्चिमांचल के जिलों से प्रदेश के मध्य एवं पूर्वी क्षेत्र में न हो इसलिए जनपद पीलीभीत से इटावा तक 10 किमी. चौड़ी एवं 320 किमी. लंबी पट्टी के अंतर्गत समस्त गोवंश का शत-प्रतिशत बेल्ट वैक्सीनेशन कराया गया।
पुन: जनपद इटावा से औरैया तक 155 किमी. लंबी पट्टी के अंतर्गत समस्त गोवंश का शत-प्रतिशत बेल्ट वैक्सीनेशन कराया गया। इसके अतिरिक्त समस्त नगर पालिकाओं एवं नगर-निगमों के चारों तरफ 10 किलोमीटर की परिधि में रिंग वैक्सीनेशन कराया गया।
बकरियों की थी यह वैक्सीन
कुछ सालों पहले बकरियों में इसी तरह का रोग फैला था। उससे निपटने के लिए गोट पॉक्स वैक्सीन ईजाद की गई थी। जब गोवंश में लंपी आया तो इसकी कोई वैक्सीन नहीं थी। ऐसे में गोट पॉक्स वैक्सीन का प्रयोग किया गया। डेढ़ करोड़ वैक्सीन लगाई गई। उसी से इस रोग की रोकथाम हो गई। हालांकि लंपी की वैक्सीन तैयार कर ली गई पर अभी उसे मंजूरी नहीं दी गई है। माना जा रहा है कि अगले साल तक लंपी की वैक्सीन आ जाएगी।