ट्रेन से फेंकी गईं बच्चियों की नानी नाजिया शनिवार सुबह बिहार से अपने रिश्तेदारों के साथ सीतापुर पहुंचीं। नानी को सामने देख जिला अस्पताल में भर्ती दोनों बच्चियां फफक पड़ीं। हादसे के चार दिन बाद अपनों को पाकर खूब सिसकीं। दोनों लोग गले लग खूब रोई। यह देख अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों व तीमारदारों के भी आंसू छलक आए। मासूमों की बेबसी के आगे सभी की आंखें नम हो गईं थीं।
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सोमवार रात बेतिया जिले के पहाड़पुर थाना क्षेत्र के सरिया बाजार निवासी इद्दू की पत्नी आफरीन, पुत्री रबिया, हसीना, अल्बुल खातून, मुन्नी व सलीमा को चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया था। जिसमें आफरीन व उसकी पुत्री मुन्नी के शव बरामद हुए थे। जबकि हसीना का पता नहीं चल सका। रबिया, अल्बुल खातून व सलीमा मौत को मात देने में कामयाब रहीं। अल्बुल व सलीमा सीतापुर जिला अस्पताल में भर्ती हैं। जबकि रबिया का लखनऊ ट्रॉमा सेंटर में इलाज चल रहा है।
बच्चियों के बताए पते के आधार पर जीआरपी की एक टीम बिहार पहुंची। इसके बाद खबर पाकर बच्चियों की नानी, बिहार के बेतिया जिले के नौतन थाना क्षेत्र के ग्राम झखरा निवासी नाजिया उर्फ रबिया (70) शनिवार को सीतापुर पहुंचीं। जीआरपी के जवान बुजुर्ग नानी को लेकर सीधे जिला अस्पताल पहुंचे। नाजिया को देखते ही वार्ड में भर्ती अल्बुल व सलीमा नानी-नानी कहते हुए उनसे चिपट गईं। नानी ने भी मासूमों पर ममता उड़ेल दी।
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अल्बुल व सलीमा नानी के गले लगकर खूब रोईं। अल्बुल बोली, नानी! अम्मी छोड़कर चली गईं। हमका घर ले चलो। नाजिया ने बच्चियों के आंसू पोंछते हुए कहा, कि चिंता न करो। अब दोनों को घर लेकर ही चलब। काफी देर तक दोनों बच्चियां नानी के सीने से चिपटीं रहीं।
आफरीन की एक बहन व एक भाई ही जिंदा बचा
अपनों से मिल रो पड़ी सलीमा
- फोटो : amar ujala
नाजिया उर्फ रबिया पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। नाजिया ने बताया कि उसकी दो पुत्रियां आफरीन व मसरुन व दो पुत्र तैयब व इस्तखार थे। तैयब की तीन वर्ष पूर्व मौत हो चुकी है। आफरीन भी नहीं रही। अब पुत्र इस्तखार बचा है। जबकि मसरन का विवाह को गया है। जब बूढ़ी नाजिया को सहारे की जरूरत थी, तब उसके सिर पर तीन नतिनों की जिम्मेदारी आ गई।
मां-बेटी के दफन होने में भी कोसों का फासला
ट्रेन से फेंके जाने के बाद आफरीन व मुन्नी की मौत हो गई है। आफरीन का शव जहां लखीमपुर जिले के मैगलगंज थाना क्षेत्र के ग्राम खखरा के निकट रेल ट्रैक के करीब झाड़ियों में पाया गया था। वहीं दूसरी तरफ मुन्नी का शव मानपुर थाना क्षेत्र में रमईपुर हाल्ट के करीब पाया गया था।
आफरीन के शव का पोस्टमार्टम लखीमपुर जिले में हुआ। जबकि मुन्नी के शव का पोस्टमार्टम सीतापुर जिले में हुआ। भाग्य की विडंबना देखिये कि मां व बेटी की मौत तो एक ही रात में हुई, लेकिन उनके शवों की दूरियां इस कदर बढ़ी, कि दफन भी साथ-साथ न हो सकीं।
मुन्नी के शव को शनिवार को मरकज कमेटी ने मुस्लिम रिवाज से पुराने सीतापुर के कब्रिस्तान में दफन किया। जबकि उसकी मां आफरीन का शव लखीमपुर जिले की मरकज कमेटी ने लखीमपुर जिले के कब्रिस्तान में दफन किया है।
अंतिम समय खाया था मछली भात
- फोटो : amar ujala
सोमवार सुबह इद्दू अपने बच्चों के साथ कश्मीर जाने को निकलने वाला था। इस वजह से सुबह के वक्त ही घर में मछली भात पकाया गया था। मछली-भात खाने के बाद आफरीन अपनी पुत्रियों व पति के साथ घर से निकली थी। मां नाजिया उर्फ रबिया रो-रो कर कह रही थी, उसके बाद उसकी बेटी को खाना ही नसीब नहीं हुआ।
बड़ी खुश होकर घर से निकली थी बेटियां
नानी नाजिया उर्फ रबिया ने बताया कि इद्दू की पत्नी आफरीन अपनी पांच पुत्रियों रबिया, हसीना, अल्बुल खातून, मुन्नी व सलीमा के साथ अपने मायके बिहार के नौतन थाना क्षेत्र के ग्राम झखरा में ही रहती थी। एक सप्ताह पहले इद्दू झखरा गांव आया था। यहां पर इद्दू ने बच्चियों को कश्मीर घुमाने के लिए राजी किया। अफरीना भी बच्चियों के साथ कश्मीर जाने के लिए राजी हो गई।
ट्रेन से सफर को लेकर बच्चियां बेहद खुश थीं। यही वजह थी कि भोर होते ही बच्चियों ने अपने हाथों में मेंहदी लगाई और मां के हाथ में भी मेंहदी लगाई। सभी ने नए कपड़े पहने और उसके बाद पूरा परिवार कश्मीर के लिए रवाना हुए।
मौत से जंग लड़ रही रबिया
ट्रेन से फेंकी गई रबिया लखनऊ ट्रॉमा सेंटर में अब भी मौत से जंग लड़ रही है। उसकी हालत में कोई खास सुधार नहीं आया है। पुलिस का कहना है कि रबिया की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है।
14 वर्ष पूर्व हुआ था आफरीन का निकाह
- फोटो : amar ujala
इद्दू की पहली पत्नी बचिया की 14 वर्ष पूर्व मौत हो गई थी। उस दौरान बचिया का पुत्र रहीस छह साल व छोटा बेटा रहीम चार साल का था। पत्नी की मौत के छह माह बाद ही इद्दू ने अपने जिले के नौतन थाना क्षेत्र के ग्राम झखरा निवासी आफरीन से निकाह कर लिया।
आफरीन से इद्दू के पांच पुत्रियां हैं। आफरीन की मां नाजिया उर्फ रबिया की मानें तो निकाह के कुछ दिन बाद से ही ससुराल में विवाद होने लगा। करीब छह वर्ष पूर्व इद्दू अपनी पुत्रियों व आफरीन के साथ झखरा गांव में अपनी ससुराल में रहने लगा। इद्दू अपनी पत्नी व बच्चों को मायके में ही रखता था।
बकरीद में भी विदा कराने आया था इद्दू
आफरीन की मां नाजिया उर्फ रबिया ने बताया कि इद्दू अपने दो बच्चों रहीस व रहीम के साथ जम्मू में ही रहता है। वह बकरीद के समय आफरीन व बच्चों को जम्मू ले जाने के लिए गांव पहुंचा था। यहां पर इद्दू ने काफी प्रयास किया, कि आफरीन व पुत्रियां उसके साथ जम्मू चलें पर आफरीन ने उसके साथ जाने से मना कर दिया।
अपनी पुत्री आफरीन व नातिन मुन्नी की हत्या के बाद आफरीन की मां नाजिया उर्फ रबिया के दिल का गुबार फूट पड़ा है। मां ने बताया कि 2013 में इद्दू ने ही कॉल करके आफरीन के भाई तैयब को बुलाया था। जिसके बाद उसका शव पड़ा मिला। मां ने कहा कि उस घटना में इद्दू बच गया। जिसके बाद उसने अब अपनी पत्नी आफरीन व एक पुत्री मुन्नी की हत्या कर दी। जबकि रबिया, अल्बुल व सलीमा की हत्या का प्रयास किया।
गुपचुप करते रहे पूछताछ
ट्रेन से फेंके जाने के मामले में जीआरपी के अधिकारी शनिवार को गुपचुप तरीके से पूछताछ करते नजर आए। दोपहर बाद जीआरपी के उपनिरीक्षक रवींद्र पांडेय व अन्य पुलिस कर्मी अस्पताल पहुंचे। जिसके बाद वे जिला अस्पताल में भर्ती अल्बुल व उसकी नानी नाजिया उर्फ रबिया खातून को लेकर जीआरपी थाने ले गई।
वहां पर जीआरपी के अधिकारी मौजूद थे। जिन्होंने घटना को लेकर गुपचुप तरीके से अल्बुल व उसकी नानी से पूछताछ की। करीब दो घंटे तक पूछताछ के बाद पुलिस दोनों को वापस जिला अस्पताल छोड़ गई।