इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने हिस्ट्रीशीटर गिरधारी एनकाउंटर मामले में संबंधित टीम के पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने यह फैसला राज्य सरकार की पुनरीक्षण याचिका को मंजूर कर सुनाया। याचिका में लखनऊ के सीजेएम के गत 25 फरवरी के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें एनकाउंटर में शामिल तत्कालीन डीसीपी संजीव सुमन समेत टीम के अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया गया था।
याची राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही का कहना था कि विभूति खंड थाने से संबंधित अजीत सिंह हत्याकांड में वांछित कन्हैया विश्वकर्मा उर्फ गिरधारी उर्फ डॉक्टर को दिल्ली से गिरफ्तार कर लखनऊ लाया गया था। पुलिस हिरासत में उसे गत 15 फरवरी को रात 2.10 बजे हत्या में प्रयुक्त असलहे की बरामदगी करवाने सहारा अस्पताल के पीछे ले जाया गया। जहां वाहन से उतरते समय उसने सिर से दारोगा अख्तर सईद उस्मानी पर हमला कर उनकी सर्विस रिवाल्वर छीन ली और फायरिंग की। इसमें कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए। वहीं, पुलिस की जवाबी फायरिंग में गिरधारी की भी मौत हो गई। शाही का तर्क था कि सीजेएम की अदालत ने गिरधारी के भाई की अर्जी पर पुलिस कर्मियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति के अभाव में केस दर्ज करने का प्रश्नगत आदेश दिया है, जो खारिज करने लायक है।
उधर, पक्षकारों के अधिवक्ता ने याचिका का विरोध किया। कोर्ट ने कहा कि प्रश्नगत आदेश पारित करते वक्त निचली अदालत ने अभियोजन स्वीकृति संबंधी प्रावधानों पर गौर नहीं किया, जो साफ तौर पर पुलिस कर्मियों को संरक्षण देते हैं। इसके मद्देनजर सीजेएम का 25 फरवरी का आदेश रद्द किया जाता है।