लखनऊ। शासन के आदेश के बाद नगर निगम ने गृहकर दाखिल खारिज (नामांतरण) के नियम सख्त कर दिए हैं। अब गैर पंजीकृत बंटवारा, दानपत्र, अनुबंध या किरायानामे के आधार पर नामांतरण नहीं होगा। एक साल पुराने पंजीकृत दस्तावेजों की जांच भी निबंधन विभाग से कराई जाएगी, ताकि स्टांप शुल्क में किसी तरह की गड़बड़ी का पता लगाया जा सके।
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी विनय राय ने सभी जोनल अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। आदेश के मुताबिक, मकान या दुकान की बिक्री, दान अथवा बंटवारे के आधार पर नामांतरण करने से पहले संबंधित दस्तावेजों का पंजीकरण जांचना अनिवार्य होगा। एक साल से अधिक अवधि के किराए या पट्टे के समझौते का पंजीकृत होना भी जरूरी है।
नामांतरण के लिए प्रस्तुत प्रत्येक विलेख पर लगे स्टांप की जांच की जाएगी। यदि स्टांप शुल्क कम जमा किया गया है या स्टांप नहीं लगा है तो प्रक्रिया रोककर मामला सक्षम अधिकारी के पास भेजा जाएगा।
शपथपत्र से नहीं चलेगा काम
अब तक कई मामलों में संपत्ति मालिक की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारी शपथपत्र के आधार पर नामांतरण करा लेते थे। आपसी बंटवारे के मामलों में भी शपथपत्र से काम चल जाता था। नए नियमों के तहत ऐसे मामलों में निर्धारित प्रमाणपत्र और पंजीकृत दस्तावेजों की जरूरत होगी। इससे बिना वैध अभिलेखों के नामांतरण कराना मुश्किल होगा।
Iगृहकर नामांतरण में गड़बड़ी रोकने के लिए शासन ने नियम सख्त किए हैं। अब बिना पंजीकृत दस्तावेजों के नामांतरण नहीं होगा।I
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- विनय राय, मुख्य कर निर्धारण अधिकारीI