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खूबसूरत नगीने तराशने का हब बनेगा लखनऊ

Fri, 23 May 2014 01:49 PM IST
अतुल भारद्वाज/अमर उजाला, लखनऊ
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मुंबई, कोलकाता और जयपुर के बाद अब लखनऊ रत्नों की तराश का केंद्र बनेगा।
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रत्नों की जांच के लिए जहां राजधानी में ही जेम आइडेंटीफिकेशन लैब (जीआईएल) बनेगी। वहीं, प्रोफेशनल तैयार करने के लिए वोकेशनल प्रशिक्षण भी मिल सकेगा।

लखनऊ यूनिवर्सिटी (एलयू) ने इसके लिए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) से हाथ मिलाया है। रत्नों के विशेषज्ञों की जरूरत को देखते हुए एलयू के जियोलॉजी विभाग ने यह कदम उठाया है।

एलयू के जियोलॉजी विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, रत्नों के विशेषज्ञों की मांग को पूरा करने के लिए एकेडमिक कोर्स शुरू किया जाएगा।

नए सत्र से शुरू होगी पढ़ाई

यह कोर्स नए सत्र में 2015 में शुरू करने की तैयारी है। कोर्स शुरू करने को विभाग की बोर्ड ऑफ स्टडीज ने भी हरी झंडी दे दी है। अब इसके लिए जरूरी सेलेबस और तकनीकी जरूरत को पूरा किया जाना है।

यह कोर्स यूजीसी की वोकेशनल स्टडीज स्कीम में मांगे गए प्रस्ताव में तैयार किया गया है।

शुरुआत में विभाग एक साल का डिप्लोमा कोर्स शुरू करेगा। इसके बाद इसकी अवधि जरूरत पाए जाने पर बढ़ा दी जाएगी। कोर्स में 20 सीट होंगी।

लखनऊ की रत्न इंडस्ट्री में होगा इजाफा

जियोलॉजी विभाग के प्रो. विभूति राय ने बताया कि अभी तक नॉर्थ इंडिया में जेमोलॉजी के लिए एक केंद्र की कमी महसूस की जा रही थी।

एएमयू का जियोलॉजी विभाग में संभावना है, इसका फायदा हम ले रहे हैं। उनके चेयरमैन प्रो. एलएके राव से सहमति मिल चुकी है। कोर्स शुरू करने से लेकर लैब की स्थापना तक में वे मदद करेंगे।

पब्लिक सेक्टर में कोलकाता में जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और जयपुर में इंडियन जेम इंस्टीट्यूट की जीआईएल के बाद लखनऊ में यह तीसरी लैब होगी।

इसका फायदा लखनऊ को रत्नों की तराश के अलावा उनकी पहचान और खामियां दूर करने के लिए विशेषज्ञ पैदा करने में मिलेगा।

वहीं, लैब के बनने से लखनऊ की रत्न इंडस्ट्री को कई गुना बढ़ने की संभावना बढ़ जाएगी।
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यह होगा फायदा

विशेषज्ञों के मुताबिक, अभी तक लखनऊ में रत्नों की पहचान और उसके तराशने के लिए विशेषज्ञों की कमी थी।

प्रशिक्षित विशेषज्ञ होने से स्थानीय इंडस्ट्री को एक पहचान मिलेगी। इससे विदेशी निर्यात भी बढ़ेगा। अभी तक मुंबई, जयपुर और कोलकाता पर निर्भरता बनी हुई है।

कोर्स के साथ हर जरूरी मदद
एएमयू के जियोलॉजी विभाग के चेयरमैन प्रो. राव का कहना है कि एलयू के प्रो. राय से सहमति बन चुकी है। जेमोलॉजी में कोर्स के सेलेबस के अलावा जरूरी तकनीकी मदद हमारा विभाग देगा।

वैसे तो उनके पास सक्षम फैकल्टी मौजूद है। जरूरी होने पर गेस्ट फैकल्टी भी उन्हें उपलब्ध कराई जाएगी। यह कवायद लखनऊ को नार्थ इंडिया में जेमोलॉजी का केंद्र बनाने के लिए दूर की कौड़ी होगी।
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