गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ अवैध खनन के मामले में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय जांच कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि गायत्री जेल से बाहर आने की सारी जुगत आजमा चुके हैं, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली है।
पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। गायत्री प्रसाद सपा सरकार में खनन विभाग के राज्य मंत्री, राज्यमंत्री स्वतत्र प्रभार और कैबिनेट मंत्री के साथ परिवहन विभाग के भी मंत्री रहे। फिलहाल वह दुष्कर्म के आरोप में बीते लगभग 6 साल से सलाखों के पीछे हैं।
विज्ञापन
गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ अवैध खनन के मामले में सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय जांच कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि गायत्री जेल से बाहर आने की सारी जुगत आजमा चुके हैं, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली है। अब उन्हें लग रहा है कि वह अपने बयानों में सपा के नेताओं का नाम ले लेंगे तो वह बच सकते हैं। गायत्री सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के बेहद खास रहे। यहां तक कि सपा सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उन्हें बर्खास्त भी कर दिया था, लेकिन मुलायम सिंह के दबाव में उन्हें न सिर्फ दोबारा मंत्री बनाया गया बल्कि ओहदा भी बढ़ा दिया गया।
मुलायम सिंह के दबाव में ही 2017 में उन्हें टिकट दिया गया और वह चुनाव हार गए। 2022 में सपा ने गायत्री की पत्नी को टिकट दिया और वह जीत कर विधान सभा पहुंच गई। लेकिन जेल में बंद गायत्री को किसी तरह की राहत मिलती नहीं दिख रही है। अब परिस्थितियां दूसरी हैं। मुलायम सिंह अब इस दुनिया में रहे नहीं। मुलायम सिंह की ही वजह से उन्होंने बेहद कम समय में राजनीति के शिखर तक पहुंच गए थे। लेकिन जिस तेजी से उन्होंने शिखर हासिल किया था, उसी तेजी से पतन भी हुआ।
विज्ञापन
पहले दुष्कर्म केमामले में वे जेल गए उसकेबाद सीबीआई ने उनके खिलाफ अवैध खनन मामले में केस दर्ज कर लिया। सीबीआई के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय ने भी जांच शुरू कर दी। जेल से बाहर आने की वह हर जुगत तलाश रहे हैं। इसी कड़ी में वह अवैध खनन के मामले में सपा के कुछ नेताओं का नाम लेकर अपनी मुश्किल आसान करने और सपा के नेताओं की मुश्किल बढ़ाने का काम कर सकते हैं।