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'दरवाजे पर था ताला तो बाहर कैसे गई गौरी'?

Thu, 12 Feb 2015 09:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ
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'आखिर कैसे यकीन कर लूं पुलिस की अधूरी कहानी पर। मैं बार-बार कह रहा हूं कि मेरी बेटी अब नहीं लौटेगी, पर उसे न्याय तो दिलाना होगा'। अंबेडकर लॉ कॉलेज की स्टूडेंट गौरी के पिता शिशिर श्रीवास्तव कहते हैं कि पुलिस की थ्योरी और खुलासा किसी के भी गले नहीं उतर रहा।
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मेरी पुलिस से गुजारिश है कि यदि ऐसा है तो इसी आधार पर गौरी का अभिभावक बनकर केस लड़े और जीतकर दिखाए। हत्यारे को फांसी होने पर मै सब स्वीकार कर लूंगा। बेटी को खोने के गम में डूबे पिता का कहना है कि पुलिस कह रही गौरी का पीछे से गला दबाया गया।

यदि ऐसा है तो क्या उसने जरा भी विरोध न किया होगा? अगर किया तो हत्यारे को कहीं न कहीं चोट जरूर आई होगी। ऐसे कई अनसुलझे सवालों के जवाब न मिलने पर चुप नहीं बैठूंगा। सीबीआई जांच की मांग को लेकर चर्चा के बाबत शिशिर ने कहा कि मुझसे लोग कह रहे हैं, ऐसा करना चाहिए।
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फिलहाल मैंने मांग नहीं की है, अभी चीजों को समझ रहा हूं। जब भी करूंगा सबको बताऊंगा। गौरी की हत्या में आरी के अलावा भी किसी हथियार का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन पुलिस बता नहीं रही है।

दरवाजे पर ताला, तो गौरी बाहर कैसे गई

शिशिर कहते हैं कि गौरी की लोकेशन 30 जनवरी की रात 11 से 11.30 के बीच मॉडल हाउस बताई जा रही है। जबकि मैं घर में आते ही दरवाजे पर ताला लगा देता हूं। ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी रात को वह बाहर क्यों और कैसे गई।

डेढ़ साल पहले सेल्समैन बन कर आया था हिमांशु
मां तृप्ता कहती हैं कि पुलिस ने हिमांशु को गौरी का प्रेमी बता दिया। जबकि वह डेढ़ साल पहले सेल्समैन बन कर आया था। यदि अंधा प्यार था तो उनमें बात क्यों नहीं होती थी? गौरी न सही हिमांशु तो उसके संपर्क में रहने की कोशिश करता। कहां है इसका सुबूत?

मोबाइल का मेमोरी कार्ड कैसे बदला
शिशिर कहते हैं कि गौरी के मोबाइल में 4जीबी का मेमोरी कार्ड लगा था। जबकि, हमें जो मोबाइल दिखाया गया, उसमें दो जीबी का मेमोरी कार्ड लगा है। कहां है मोबाइल के सारे कंटेट, हमें क्यों नहीं दिखाए जा रहे। क्यों छिपाया जा रहा है उसे।
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गौरी का मर्डर पूरी प्लानिंग के साथ हुआ

पुलिस कह रही है कि सिर्फ लाल सलवार मिली है, जो हमें दिखाई गई। बाकी के कपड़े-चप्पलें नहर में बह गईं। क्या इस बात का पता किया गया कि नहर में पानी खोला गया था या नहीं? कपड़े यदि बह गए तो क्या, कहीं तो फंसे होंगे। उन्हें ढूंढा क्यों नहीं गया।

मैं फिर कह रहा हूं कि गौरी का मर्डर अचानक नहीं किया गया। यह प्लांड मर्डर है। मुझसे पूछा जा रहा है कि मैंने गौरी की मौत से जुड़ी पुलिस की कहानी को स्वीकार कर लिया। यह सब कोरी अफवाह है। सब बौखलाए हुए हैं। मैं यह साफ कर देना चाहता हूं कि जब तक गौरी के हत्यारे पकड़े नहीं जाते, तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे। पुलिस जो कह रही है सब ‘फैब्रीकेटेड’ है।
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