पदाधिकारियों के मुताबिक इस बार सामान्य पूजन में बदले स्वरूप के तहत सांस्कृतिक आयोजन नहीं होंगे। एक सभागार में पूजन होंगे, जहां गाइडलाइन के तहत श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन कर सकेंगे। प्रसाद चढ़ाने और वितरण की व्यवस्था नहीं रहेगी।
प्रयास रहेगा कि सोशल मीडिया के तहत श्रद्धालु घर से भी गजानन के दरबार के दर्शन कर सके। कमेटी इस बात पर भी विचार कर रही है कि 10 दिनों के दौरान हर दिन दरबार से कोरोना से जंग के हथियार सैनिटाइजर, मास्क, जरूरतमंदों को राशन आदि वितरण के अलावा रक्तदान शिविर भी लगाया जाए। इन सारी योजनाओं पर फैसला रविवार को होने वाली बैठक में लिया जाएगा।
मनौतियों के राजा का पूजा पंडाल की भव्यता का अंदाजा इसी प्रकार लगाया जा सकता है कि हर साल गणपति पूजा शुरू होने से 40-45 दिन पहले पंडाल का निर्माण शुरू हो जाता है।
15 से 18 हजार स्क्वॉयर फीट में बनने वाले मुख्य पंडाल को हर साल किसी न किसी थीम पर तैयार किया जाता है। इसे बंगाल और असम के कारीगर बांस, प्लाई आदि से सजाते हैं। पंडाल का भारी भरकम बीमा होता है।