आजाद भारत के पहले दिन (15 अगस्त 1947) मुंबई के एक डाकघर से भेजे गए पत्र का लिफाफा हो या फिर 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू होने का साक्ष्य दर्शाता आवरण। अतीत के झरोखे के इन यादगार लम्हों को अब शहरवासी भी देख सकेंगे।
जीपीओ में डाक विभाग ने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर अब तक के सफर को चार कमरों वाले म्यूजियम में संजोकर रखा है। उत्तरप्रदेश के पहले फिलेटिक म्यूजियम का उद्घाटन जीपीओ में चीफ पोस्ट मास्टर जनरल आशुतोष त्रिपाठी ने किया।
जीपीओ के पहले तल पर स्थित फिटेलिक ब्यूरो ऑफिस में ही इस म्यूजियम को बनाया गया है। सुबह दस से शाम छह बजे तक शहरवासी नि:शुल्क म्यूजियम की सैर कर सकेंगे।
म्यूजियम में 36 फ्रेम में डाक टिकट और आवरण को सजाया गया है। स्वतंत्रता आंदोलन के लिए महात्मा गांधी की दांडी यात्रा पर आधारित डाक टिकट भी उपलब्ध है।
सन 1951 में हुए पहले एशियाई गेम पर आधारित मशाल जलती हुई चित्र वाला डाक टिकट भी मौजूद है। महात्मा गांधी की पहली पुण्यतिथि पर 30 जनवरी 1949 को जारी हुआ। आवरण भी म्यूजियम की शोभा बढ़ा रहा है।
दस मई 1984 को जारी हुआ बेगम हजरत महल पर टिकट, फिल्म अभिनेता राजकपूर और गायिका बेगम अख्तर पर भी टिकट म्यूजियम में लगा हुआ है। लखनऊ घराने का कथक भी डाक टिकट पर उतर आया है।
दिखेंगे डाक के ब्रिटिशकालीन बॉक्स
जीपीओ के म्यूजियम में अंग्रेजों के समय इस्तेमाल होने वाले डाक बॉक्स के अलावा उस समय के दस्तावेज भी जल्द ही मंगाए जाएंगे। निदेशक डाक सेवाएं वीके दक्ष ने बताया कि प्रदेश भर से डाक विभाग के ऐसे ही दुर्लभ वस्तुओं को लखनऊ लाने का आदेश दिया गया है।