लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में जन्मजात और आनुवंशिक बीमारियों की समय रहते पहचान के लिए सोमवार को नई पहल शुरू की गई। पैथोलॉजी विभाग में भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के निदान केंद्र तथा नवीनीकृत स्नातक और स्नातकोत्तर प्रयोगशालाओं का उद्घाटन कुलपति डाॅ. सोनिया नित्यानंद ने किया गया।
डीबीटी निदान परियोजना की प्रमुख डॉ. मिली जैन ने बताया कि केंद्र की स्थापना डीबीटी की उम्मीद योजना के तहत की गई है। इसका उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान और जन्म के बाद बच्चों में होने वाली गंभीर आनुवंशिक एवं जन्मजात बीमारियों की शुरुआती पहचान करना है। गर्भावस्था के पहले तीन महीनों में गर्भवती महिला और उसके पति की थैलेसीमिया जांच की जाएगी। जरूरत पड़ने पर गर्भ में पल रहे शिशु की विशेष जांच कर बीमारी के जोखिम का आकलन किया जाएगा। नवजात शिशुओं के जन्म के तीसरे से पांचवें दिन एड़ी से रक्त का नमूना लेकर चार प्रमुख जन्मजात बीमारियों की जांच होगी। इनमें जी-6-पीडी की कमी, जन्मजात हाइपोथायरॉयडिज्म, गैलेक्टोसीमिया और जन्मजात एड्रिनल हाइपरप्लासिया शामिल हैं। सभी जांचें पूरी तरह निशुल्क होंगी।