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प्लास्टिक के आधार कार्ड के नाम पर ठगी, न दें निजी सूचानाएं

Wed, 13 Apr 2016 12:10 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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आधार कार्ड - फोटो : Demo
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किसी भी प्रमुख बाजार या मार्ग पर सौ दो सौ रुपये लेकर प्लास्टिक के आधार कार्ड बनाने वालों से सावधान होने की जरूरत है। भारतीय विशिष्ट पहचानप्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने गाइडलाइन जारी कर ऐसे फ्रॉड करने वालों से बचने की सलाह दी है।
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आधार बनाने वाली सरकारी संस्था यूआईडीएआई के महानिदेशक डॉ. अजयभूषण पांडेय ने कहा है कि आधार धारक ऐसी अवैध एजेंसियों के झांसे में न आएं। प्लास्टिक के स्मार्ट आधार कार्ड छापने जैसी व्यवस्था नहीं है। 

आधार पत्र या इसका काटा गया हिस्सा अथवा किसी सामान्य कागज पर आधार का डाउनलोड किया संस्करण पूरी तरह वैध है। प्राधिकरण से भेजे गए कार्ड को भी लेमिनेट कराने की आवश्यकता नहीं है। यह खुद में पर्याप्त है। 
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आधार कार्ड खोने पर नंबर की मदद से वेबसाइट से दोबारा डाउनलोड किया जा सकता है। प्लास्टिक कार्ड के लिए अधिकृत सामान्य सेवा केंद्र अथवा स्थायी आधार नामांकन केंद्र पर 30 रुपये देकर प्रिंट करा लें। यहां कार्ड धारक की व्यक्तिगत सूचनाएं पूरी तरह गोपनीय और सुरक्षित रखी जाएंगी।
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...तो हो सकती है जेल

डेमो ‌प‌िक
प्लास्टिक का कथित स्मार्ट आधार कार्ड प्रिंट कराने के लिए अपनी आधार संख्या तथा अपनी व्यक्तिगत सूचना अनाधिकृत एजेंसी से लोग साझा करते हैं। यह उनके साथ फ्रॉड का जरिया बन सकता है।

प्राधिकरण ने ई-कॉमर्स कंपनियों को भी उनसे जुडे़ व्यापारियों द्वारा आधार कार्ड से जुड़ी सूचना लेने को मना करने का निर्देश दिया गया है। ऐसी सूचना एकत्र करना या अनाधिकृत रूप से आधार प्रिंट करना दंडनीय अपराध है।

ऐसे लोगों की किसी भी प्रकार से मदद करना भी एक दंडनीय अपराध है। इसमें भारतीय दंड संहिता तथा आधार टार्गेटेड डिलीवरी ऑफ  फ ाइनेंसियल एंड अदर सब्सिडीज बेनेफि ट्स एंड सर्विसेस अधिनियम 2016 में जेल भेजने का प्रावधान है।
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