सीएजी रिपोर्ट में निजी उत्पादक कंपनियों के साथ बिजली क्रय अनुबंध (पीपीए) में गड़बड़ियों का खुलासा होने के बाद राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
परिषद का कहना है कि पीपीए में करीब 5000 करोड़ रुपये का वारा-न्यारा किया गया है।
महंगी बिजली खरीदने का पीपीए किए जाने का खामियाजा आम उपभोक्ताओं को ज्यादा दर के रूप में भुगतना पड़ रहा है जबकि निजी कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा कि रिलायंस और बजाज हिंदुस्तान से खरीदी जा रही महंगी बिजली को लेकर सीएजी की आपत्तियों से परिषद के उन आरोपों की पुष्टि हो गई है कि चुनिंदा निजी घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए मनमाने ढंग से पीपीए किया गया है।
परिषद की याचिका पर नियामक आयोग ने भी पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन से महंगी बिजली खरीद के बारे में जवाब तलब किया लेकिन आज तक सही जवाब नहीं दिया गया।
सरकार को पावर कॉर्पोरेशन और निजी कंपनियों के बीच हुए पीपीए की सीबीआई जांच कराकर दोषी लोगों को दंडित करना चाहिए।