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मजदूरों को कोविड मरीज बनाकर किया जाता था भर्ती, खर्च बचाने के लिए प्रशासन से रेफर कोविड मरीजों को भर्ती करने के लिए पहले भी किया गया था खेल

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लखनऊ। डॉ. एमसी सक्सेना ग्रुप ऑफ मेडिकल कॉलेज साइंसेज में मान्यता के लिए मजदूरों को बंधक बनाकर मरीज के रूप में भर्ती करने के खुलासे के बाद कई और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस के अनुसार, कोविड काल के दौरान भी संस्थान में सरकारी रेफर मरीजों को भर्ती न करने के लिए दिहाड़ी मजदूरों को अस्पताल में कोविड मरीज के रूप में भर्ती दिखाया गया ताकि अस्पताल पर अनावश्यक खर्च का बोझ न पड़े।
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पुलिस की शुरूआती पड़ताल में सामने आया है कि संस्थान ने यह खेल पहली बार नहीं किया है। इसके पहले भी कई बार इस तरह का खेल किया गया। कोविड संक्रमण काल में जब आरआर मेमोरियल अस्पताल को प्रशासन ने अधिग्रहीत कर लिया था तो उस समय सरकारी रेफर मरीजों को न भर्ती करना पड़े, इसके लिए भी खेल किया गया। संस्थान से जुड़े लोगों ने मजदूरों को कोविड मरीज बताकर अस्पताल में भर्ती किया था। उनके रिकॉर्ड का हवाला देकर प्रशासनिक अधिकारियों को गुमराह किया गया ताकि सरकारी रेफर मरीजों को भर्ती कर नुकसान न उठाना पड़े। पुलिस इस बिंदु की जांच के लिए संस्थान के दस्तावेजों की भी पड़ताल करने की बात कह रही है।
मान्यता के लिए अस्पताल में प्रतिदिन 600 मरीजों की ओपीडी दिखानी जरूरी होती है। ऐसे में इस मानक को पूरा करने के लिए इस संस्थान के कोऑर्डिनेटर को लगाया गया था। वह प्रतिदिन आसपास के चार प्रमुख इलाकों से मजदूरों की तलाश करते थे। उनको लोडर पर लादकर अस्पताल पहुंचाते थे जहां उनको मरीज बनाने के लिए मजदूरी दी जाती थी। सभी का रिकॉर्ड भी दस्तावेजों में दर्ज किया जाता था। मूलरूप से सीतापुर के बिहड़ा निवासी अंशु कुमार ने ठाकुरगंज थाने में तहरीर दी जिसमें कहा कि वह जानकीपुरम इंजीनियरिंग कॉलेज के पास लेबर अड्डे पर रोज काम की तलाश में आता है। मंगलवार सुबह इंजीनियरिंग कॉलेज के पास खड़ा था। इसी बीच एमसी सक्सेना ग्रुप ऑफ कॉलेज बरावनकला के कुछ लोग पहुंचे। मजदूरों से 500-500 रुपये दिहाड़ी पर बातचीत की। उनसे कहा कि इसके अलावा खाना-पीना भी दिया जाएगा। वहां लोडर में भरकर करीब 70-80 मजदूर लेकर आरआर सिन्हा मेमोरियल हॉस्पिटल जो डॉ. एमसी सक्सेना ग्रुप ऑफ मेडिकल कॉलेज साइंसेज के परिसर में है, वहां पहुंचा गया। वहां पर्चा बनाकर हमारे हाथ में इंजेक्शन लगाए गए जिसका विरोध किया तो अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों व अधिकारियों ने धमकी दी।
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खून व किडनी निकालने का संदेह होने पर डर गया
अंशु ने पुलिस को बताया कि अस्पताल में उसे लगातार दो से तीन इंजेक्शन दिए गए जिससे वह डर गया। उसने विरोध किया तो धमकाया गया। कहा गया कि जो कहा जाए उतना ही करो। उसे डर लगा कि कहीं ये लोग बेहोश करके खून या किडनी न निकाल लें। किसी तरह वहां से बाहर निकला और दौड़ते हुए थाने पहुंचा। पुलिस को पूरी बात बताई। इस पर पुलिस ने अस्पताल परिसर में छापा डाला तो वहां पर कई मजदूर मिले। पुलिस ने मजदूरों को मुक्त कराया।
कई दिनों से चल रहा था खेल
पुलिस की शुरूआती पड़ताल में सामने आया है कि मजदूरों को बेड पर लिटाकर मरीजों का कोटा पूरा करने का खेल संस्थान में कई दिनों से चल रहा था। संस्थान से जुड़े कोऑर्डिनेटर, पास के चार इलाकों दुबग्गा, डालीगंज, जानकीपुरम और बालागंज से मजदूरों को रोज दिहाड़ी के नाम पर लाते थे। उनको मरीज बनाकर कागजी कार्रवाई पूरी कर देर शाम छोड़ देते थे। कुछ मजदूरों को दो या तीन दिन बाद छोड़ा जाता था ताकि अस्पताल के रिकॉर्ड में उनको भर्ती करने और इलाज करने की पुष्टि हो सके।
मेडिकल में नहीं हुई बीमारी की पुष्टि
पुलिस ने बरावन कला स्थित आरआर मेमोरियल अस्पताल से मुक्त कराए गए मजदूरों में 15 का मेडिकल कराया गया। जांच में इन मजदूरों में किसी भी बीमारी की पुष्टि नहीं हुई। मेडिकल करने वाले ठाकुरगंज स्थित टीबी अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. रवि शेखर के मुताबिक, 13 मजदूरों का चिकित्सकीय परीक्षण हुआ। सभी के हाथ में विगो लगाने का निशान मिला है। मजदूरों को न तो कोई चोट लगी थी और न ही कोई बीमारी थी।
सिर्फ नाटक करना है मरीज हो
मजदूर लालबाबू ने बताया कि लेबर अड्डे पर था। उसी समय एक व्यक्ति आया और कहा कि 400 रुपये मिलेगा। जितने लोग हों सभी को साथ ले लो। वहां पहुंचे तो कहा कि सिर्फ बेड पर लेटना है। मरीज होने का नाटक करना है। सुबह पहले दलिया दिया गया नाश्ते में। कुछ डॉक्टर आए तो दवा लिखी। इसके बाद चले गए। दोपहर बाद कुछ और डॉक्टर आए। उन्होंने कहा कि ये स्वस्थ हैं, मरीज हो ही नहीं सकते। इसी बीच एक आदमी भाग गया जिसके कुछ देर बाद पुलिस ने आकर हम लोगों को वहां से निकाला।
दो से ढाई सौ लोग थे अस्पताल में
लखीमपुर खीरी के मैगलगंज निवासी अवध विहारी ने बताया कि चार अड्डों से लोगों को लाया गया था। हम भी अपने अड्डे पर खड़े थे। वहां एक गाड़ी से लोग पहुंचे। कहा कि मजदूरी मिलेगी। इसके बाद एमसी सक्सेना ग्रुप के अस्पताल में लेकर गए जहां बिना किसी बीमारी के विगो लगाया। वहीं कई तरह की दवाईयां व इंजेक्शन लगाने की कोशिश की। अस्पताल में जहां हमें रखा गया था, वहां पर दो से ढाई सौ लोग मौजूद थे। इसी बीच हमारा साथी भाग गया। उसकी तलाश की जा रही थी कि तभी कुछ ही देर में वहां पुलिस पहुंच गई।
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