लखनऊ। तहसील मोहनलालगंज के एक लेखपाल का सेवानिवृत्ति के बाद बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। रजिस्ट्रार कार्यालय में प्रभारी पद पर तैनाती के दौरान लेखपाल ने फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग कर करोड़ों रुपये की 17 बीघा जमीन समेसी ग्राम पंचायत के एक मजरे के दो लोगों के नाम दर्ज कर दी थी। फर्जीवाड़े का ये मामला शनिवार को सोशल मीडिया पर वायरल होने पर मोहनलालगंज एसडीएम ने जांच के बाद रिटायर्ड लेखपाल के विरुद्ध केस दर्ज कराने के आदेश दिए। इसके बाद रजिस्टार कानूनगो की तहरीर पर पुलिस ने रिटायर्ड लेखपाल के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
पुलिस के मुताबिक, मोहनलालगंज तहसील के रजिस्ट्रार कार्यालय में प्रभारी पद पर तैनाती के दौरान लेखपाल उमाशंकर वर्मा निवासी निवासी ग्राम करोरवा ने डिजिटल-की का प्रयोग करके नायब तहसीलदार निगोहां द्वारा डेढ़ बीघे भूमि दर्ज करने के आदेश में हेराफेरी की। फिर दो बड़े गाटा संख्या जिनके खातेदार सनी शेखर, चंद्रशेखर, इंद्रशेखर सहित अन्य लोग काफी अरसे से लापता थे, उनकी जगह रामबली पुत्र उमाशंकर निवासी रसूलपुर व रत्नेश कुमार पुत्र कैलाश निवासी रसूलपुर का नाम फर्जी तरीके से दर्ज कर दिया गया। जबकि उक्त वाद संख्या पर नायब तहसीलदार न्यायालय का असली आदेश दूसरी जमीन को लेकर था, जिसमें सालिगराम निवासी इब्राहिमाबाद व श्रवण कुमार निवासी सलेमपुर के नाम दर्ज करने थे।
रिटायर्ड लेखपाल की करतूत का मेसेज शनिवार को सोशल मीडिया पर वायरल तो एसडीएम डॉ. शुभी सिंह ने तहसीलदार संदीप त्रिपाठी को पूरे मामले की जांच के आदेश के दिए। जांच में रिटायर्ड लेखपाल उमाशंकर का फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया। इसके बाद एसडीएम डॉ. शुभी सिंह के आदेश पर रजिस्ट्रार कानूनगो अशोक कुमार पांडेय ने मोहनलालगंज कोतवाली में तहरीर दी। इंस्पेक्टर दीनानाथ मिश्र ने बताया कि मामले में रिटायर्ड लेखपाल उमाशंकर वर्मा के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज करके छानबीन शुरू कर दी है।
अन्य कार्यों की भी होगी जांच
रिटायर्ड लेखपाल उमाशंकर वर्मा ने रजिस्ट्रार कानूनगो के प्रभारी पद पर रहते हुए डिजिटल-की का दुरुपयोग करके नायब तहसीलदार के आदेश में हेराफेरी की थी। मामला संज्ञान में आने पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। उमाशंकर की तैनाती के समय के अन्य कार्यों की भी जांच कराई जाएगी।
- शुभी सिंह, एसडीएम मोहनलालगंज