निष्कासित विद्यार्थियों के समर्थन में आए पूर्व छात्र नेता
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि के विरोध में प्रदर्शन कर रहे तीन छात्रों के निष्कासन के बाद शुरू हुए धरने को अब कई पूर्व छात्र नेताओं और राजनीतिक दलों का समर्थन मिल रहा है। धरने के आठवें दिन मंगलवार को विवि परिसर पहुंचे पूर्व छात्र नेताओं ने विवि प्रशासन पर छात्रों के उत्पीड़न का आरोप लगाया। छात्रों पर एफआईआर, निलंबन और निष्कासन जैसी कार्रवाई को वापस लेने की मांग की गई। इस संबंध में मंगलवार को कुलपति से छात्रों की वार्ता होनी थी जो उनकी अनुपलब्धता की वजह से नहीं हो सकी। इस दौरान पूर्व छात्र नेताओं ने एक संयुक्त मंच बनाने की घोषणा की।
छात्र नेता प्रिंस प्रकाश, प्रेम प्रकाश और हर्षित शुक्ला धरने का नेतृत्व कर रहे हैं। पूर्व छात्र पदाधिकारियों ने लगभग पांच-छह घंटे तक धरना स्थल पर उपस्थित रहकर छात्रों का समर्थन किया। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि कुलपति को चार दिन पहले सूचना देने के बावजूद कोई वार्ता नहीं हुई। छात्रों का आरोप है कि विवि प्रशासन लगातार संवाद से बच रहा है। इससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण होती जा रही है। पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष सरोज तिवारी, नीरज जैन, सपा विधायक रविदास मल्होत्रा, मनोज तिवारी, राकेश सिंह राणा, राम सिंह राणा, संजय शुक्ला और दीपक रंजन सहित कई नेता मौजूद रहे। सभी ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली को छात्र विरोधी बताया।
इस दौरान वक्ताओं ने छात्र संघ चुनाव न कराने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने छात्रों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित रखना अनुचित है। सभी ने निष्कासित छात्रों पर की गई कार्रवाई तत्काल वापस लेने की मांग की। छात्र नेताओं ने फीस वृद्धि को तत्काल वापस लेने की मांग की। पूर्व छात्र नेताओं ने एक संयुक्त मंच बनाने की घोषणा की। यह मंच प्रदेश भर के पूर्व छात्र पदाधिकारियों और विभिन्न कॉलेजों के छात्र नेताओं के साथ मिलकर तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य छात्र हितों की आवाज को प्रभावी तरीके से उठाना है। छात्र नेताओं ने कहा कि संवाद स्थापित होने तक आंदोलन जारी रहेगा।