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अपने बाप के सामने ही बच्ची से दरिंदगी की, पांच गिरफ्तार

Thu, 20 Oct 2016 01:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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पारा में कारपेंटर के घर डकैती व उसकी बेटी से दरिंदगी का खुलासा करते हुए पुलिस ने सीतापुर निवासी शंभू रावत व उसके बेटे गुड्डू व सरोज सहित पांच डकैतों को बुधवार दोपहर काकोरी में मोहान रोड से गिरफ्तार कर लिया।
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एसएसपी मंजिल सैनी ने बताया कि गुड्डू ने अपने पिता के सामने ही बाग में बच्ची से हैवानियत की थी। इस सनसनीखेज वारदात में 12 बदमाश शामिल थे। सात आरोपी अब भी फरार हैं। क्राइम ब्रांच और पारा पुलिस इनकी तलाश में लगाई गई है।

एसएसपी ने बताया कि डकैतों का गिरोह सीतापुर के एक ही परिवार का है। इसमें 15 से अधिक बदमाश हैं और शंभू सरगना है। काकोरी के बाजनगर में डकैती की वारदात इसी गिरोह ने की थी। बदमाश दिन में मजदूरी के बहाने रेकी करते थे और रात में मकान की बिजली काटकर धावा बोल देते थे। पारा के सलेमपुर पतौरा में 26 सितंबर की आधी रात 12 डकैतों ने कारपेंटर के घर को निशाना बनाया था।
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शंभू के खिलाफ सीतापुर के सदरपुर थाने में चोरी, नकबजनी, हत्या का प्रयास, बलवा, नशीले पदार्थों की खरीद-फरोख्त के अलावा गुंडा एक्ट व गैंगस्टर के 11 मुकदमे दर्ज हैं। वहीं, पारा एसओ अनुराग मिश्रा ने बताया कि वारदात से पहले बदमाश पैंट-शर्ट उतारकर कच्छा-बनियान पहन लेते थे। एक बदमाश कपड़ों की रखवाली करता था।

जेवर-कैश न मिलने से खिसियाए थे डकैत

एसएसपी ने बताया कि कैश-जेवर न मिलने से खिसियाए डकैत उसकी बेटी को ले गए थे। सभी नशे में धुत थे। बच्ची को उठाने वाला डकैत धनेश था। सबसे पहले उसने ही बच्ची से दरिंदगी की। इसके बाद चेतराम, गुड्डू, इंदल और दिनेश ने भी बच्ची को दबोच लिया। जबकि सरगना शंभू ने इसका विरोध किया था।

ये डकैत हत्थे चढ़े
सीतापुर के सदरपुर अहिबनपुर निवासी शंभू रावत, गुड्डू रावत, सरोज रावत, सीतापुर के मथुरा रामपुर स्थित दहला गांव का इंदल व थानगांव के छंगापुरवा गांव का चेतराम।

पुलिस टीम को 15000 का इनाम
आईजी ए. सतीश गणेश ने वारदात का खुलासा करने वाली टीम को 15 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की है। टीम में क्राइम ब्रांच के सर्विलांस प्रभारी अक्षय कुमार, स्वाट टीम के प्रभारी जेबी पांडेय, अखिलेश चंद्र पांडेय, रमेश सिंह रावत, धीरेंद्र शुक्ला, भृगु नाथ ओझा, एसओ अनुराग मिश्रा, राजीव यादव, राजेश यादव थे।

डीएनए से मिली लीड, बटोई ने दिया सुराग

एसएसपी ने बताया कि डकैती और दरिंदगी केस में आठ संदिग्धों के डीएनए सैंपल लिए थे। जांच में एक बदमाश का डीएनए पीड़िता से मैच हो गया, लेकिन आरोपी कबूलने को तैयार नहीं हुआ।

इसके बाद उक्त बदमाश के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल खंगाली गई। इसके बाद दबिश के दौरान दिनेश के घर से काकोरी के बाजनगर से लूटी गई 22 किलो की पीतल की बटोई मिल गई। पीड़ित परिवार ने बटोई पहचान ली। एसएसपी ने फिर से सारे डकैतों का डीएनए टेस्ट कराने की बात कही है।

डकैत की पत्नी-बेटी भी गिरफ्तार
डकैत दिनेश रावत की पत्नी रूपा और बेटी पुष्पा को भी काकोरी पुलिस ने मंगलवार शाम गिरफ्तार कर लिया। एसएसपी ने बताया कि दिनेश के घर से काकोरी के बाजनगर निवासी रामकिशन के घर से लूटे गए बर्तन व जेवर बरामद हुए थे।

इन्हीं डकैतों को 25 हजार लेकर छोड़ा था पुलिस ने

पारा में कारपेंटर के घर डकैती और उसकी मासूम बेटी से दरिंदगी की जघन्य वारदात न होती अगर काकोरी पुलिस डकैतों को रुपये लेकर न छोड़ती।

यह सनसनीखेज और शर्मनाक खुलासा खुद बुधवार को पकड़े गए डकैतों ने किया। डकैत शंभू ने बताया कि काकोरी में एक चोरी के मामले में शक के आधार पर उसे व दो बेटों को काकोरी पुलिस ने पकड़ा था। पूछताछ के बाद 25 हजार रुपये लेकर छोड़ दिया गया था।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आईजी जोन ए. सतीश गणेश और एसएसपी मंजिल सैनी सहित सभी अधिकारियों को पुलिस के इस संगीन खेल की जानकारी है लेकिन, कार्रवाई तो दूर जांच के आदेश तक नहीं दिए गए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि 13 जुलाई की रात काकोरी के बाजनगर में चाय का ठेला लगाने वाले रामकिशन के घर डकैती की वारदात के दस दिन बाद शंभू व उसके दो बेटों को सीतापुर से पकड़कर लाया गया था।

पुलिस को काकोरी में हुई एक चोरी की छानबीन के दौरान शंभू का मोबाइल नंबर घटनास्थल पर एक्टिव मिला था। इसके बाद तत्कालीन एसओ और क्राइम ब्रांच के एक दरोगा ने दबिश देकर शंभू व उसके बेटों को पकड़ लिया।

यहां भी चूक गई पुलिस...

तीनों से लगभग 20 दिन तक थाने में पूछताछ की जाती रही। इस दौरान पुलिस यह अंदाजा ही नहीं लगा सकी कि बाजनगर में डकैती की वारदात इन्हीं पिता-पुत्रों और उनके गिरोह के सदस्यों ने की थी। न ही पुलिस ने डकैती के शिकार परिवारीजनों से शंभू और उसके बेटों की पहचान कराई।

हो सकता है कि सामने आने या आवाज सुनने पर रामकिशन व उसके परिवारीजन डकैतों को पहचान लेते। अगस्त के आखिरी सप्ताह में ही पुलिस ने 25000 रुपये लेकर तीनों को छोड़ दिया।

शंभू ने बताया कि बाराबंकी की डकैती में पकड़े गए 17 परिवारीजनों की कोर्ट में पैरवी के लिए उसे रुपयों की जरूरत थी। इसलिए चोरी और लूटपाट की ताबड़तोड़ वारदातें कर रहा था। पुलिस की गिरफ्त से छूटने पर उसका हौसला बढ़ गया और उसने पारा में वारदात कर डाली। फजीहत के डर से पुलिस अधिकारी खुद इस मामले को दबाने में जुटे हैं।
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सांसद ने भी की थी डकैतों की पैरवी

काकोरी पुलिस की हिरासत में शंभू और उसके बेटों को छुड़ाने के लिए एक सांसद ने भी पैरवी की थी। शंभू ने बताया कि उसने ही सांसद के पास अपने परिवारीजनों को भेजकर पैरवी कराने के लिए कहा था। सांसद का फोन आने के बाद पुलिस का रुख कुछ नरम हुआ और उसे रुपये लेकर छोड़ दिया गया।

बाराबंकी में डाला था ढाई करोड़ का डाका
डकैती के इसी गिरोह ने फरवरी में बाराबंकी के फतेहपुर थाना क्षेत्र में एक मकान से ढ़ाई करोड़ का माल लूटा था। वारदात में शंभू का भाई बिरजू, बेटा नरेश व भांजा पिटू रावत सहित 17 बदमाश गिरफ्तार किए गए थे।
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