ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को चेक देते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : amar ujala
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामलला को अनुष्ठान पूर्वक अस्थायी मंदिर में शिफ्ट करने के बाद 11 लाख रुपये का चेक भी रामलला को दान दिया। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने स्वयं के खाते से 11 लाख का चेक सौंपा और कहा कि अब वह दिन दूर नहीं जब रामलला भव्य मंदिर में विराजेंगे।
रामलला का छप्पन भोग लगाया गया।
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डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने रामलला के लिए छप्पन भोग का प्रसाद भिजवाया। जिसे विश्व हिंदू परिषद के नेताओं ने रामलला को चढ़ाया। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने श्रीराम लला को छप्पन भोग का प्रसाद समर्पित कर राष्ट्र समाज पर आये संकट से मुक्ति और कल्याण की प्रार्थना की है। देश में लॉकडाउन के चलते वह अयोध्या नहीं पहुंच सके।
432 वर्ग फीट के वैकल्पिक गर्भगृह में रामलला की गरिमा व सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध और दर्शनार्थियों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया है। सोमवार को ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य एवं अयोध्या राजपरिवार के मुखिया बिमलेंद्र मोहन मिश्र ने साढ़े नौ किलो चांदी का भव्य सिंहासन भेंट किया। इसी सिंहासन पर बुधवार को रामलला को विराजित किया गया।
नया भवन जर्मन एवं इस्टोनिया पाइन से बना है। मंदिर की लंबाई 24 फिट, चौड़ाई 17 फिट व ऊंचाई 19 फिट है। इसके ऊपर 35 इंच का शिखर है। यह लकड़ी सभी मौसम में एक समान रहेगी।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि वर्षों की संकल्प की सिद्धि का पहला चरण पूरा हुआ है। वर्षों की साध जो हृदय में समायी हुई थी वह अब प्रस्फुटित होती नजर आ रही है। रामलला के नए घर में विराजने की खुशी असीम है।
रामलला का टेंटवास खत्म होने से हम आह्लादित है। अब ज्यादा दिन नहीं बचा है, दो वर्षों के भीतर रामलला के दिव्य-भव्य मंदिर का भी निर्माण पूरा हो जाएगा और रामलला दिव्य भवन में विराजेंगे।
रामजन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने मानस की पंक्ति जो आनंद सिंधु सुख राशि, सीकर ते तैलोक सुपासी...के जरिए कहा कि जिस प्रकार समुद्र का आनंद अथाह सागर है, ऐसा ही आनंद का सागर राम के दरबार में दिखा। जिस सागर की एक बूंद से भी निकलने वाला सुख आनंद के समान है। कुछ इसी तरह की अनुभूति हुई।
रामलला को 27 वर्षों बाद नए मंदिर में विराजित होते देखने मानो स्वप्न का साकार होना है। अब वह दिन दूर नहीं जब रामलला भव्य मंदिर में विराजेगें।