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आयुष्मान भारत योजना के तहत केजीएमयू में पहला ऑपरेशन, डॉक्टरों ने 10 साल की बच्ची को दी नई जिंदगी

Fri, 12 Oct 2018 11:24 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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आयुष्मान योजना के तहत आरती की सर्जरी करने वाली टीम के साथ मंत्री आशुतोष टंडन - फोटो : amar ujala
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लखनऊ केजीएमयू में बृहस्पतिवार को आयुष्मान भारत योजना के तहत पहला ऑपरेशन सीवीटीएस विभाग में हुआ। बच्ची को सांस लेने में तकलीफ  थी। बार-बार सीने में संक्रमण हो रहा था। घर वाले उसे लेकर केजीएमयू के लॉरी कॉर्डियोलॉजी विभाग पहुंचे तो ओपीडी में डॉक्टरों ने ईको जांच की सलाह दी।
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जांच में पेटेंट डक्ट्स आरटेरियोसिस लाइगेशन  बीमारी का पता चला और ऑपरेशन की बात कही गई। घर वालों को ऑपरेशन का खर्च उठा पाने में अक्षम देखकर डॉक्टरों ने आयुष्मान भारत योजना के तहत सर्जरी की। बच्ची अभी आईसीयू में है और स्वस्थ है। ऑपरेशन दौरान पहुंचे चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने डॉक्टरों के कार्य को सराहा।

इंदिरा नगर तकरोही स्थित दीनदयालपुरम आरती सोनकर (10) को हफ्ते भर पहले उसकी मां ने ओपीडी में दिखाया था। मरीज आयुष्मान योजना की पात्र थी। डॉक्टरों ने उसे सीवीटीएस विभाग में भर्ती किया था। बृहस्पतिवार को बच्ची के ऑपरेशन का फैसला लिया गया था।
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सीवीटीएस विभागाध्यक्ष प्रो. एसके सिंह के नेतृत्व में डॉ. विजयंत देवेनराज, डॉ. सर्वेश कुमार एवं निश्चेतना विभाग के प्रो. दिनेश कौशल ने बच्ची का ऑपरेशन किया। विभागाध्यक्ष प्रो. एसके सिंह ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत विभाग में पहले मरीज का ऑपरेशन किया गया।

 
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जानें, क्या है पेटेंट डक्ट्स आरटेरियोसिस

- फोटो : डेमो
चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने डॉक्टरों के कार्य की सराहना की। कहा कि राज्य सरकार का पूरा प्रयास एवं सहयोग रहेगा कि केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ इसके अंतर्गत आने वाले प्रत्येक व्यक्ति एवं उसके परिवार को मिल सके। इस अवसर पर कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने सीवीटीएस विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एसके सिंह एवं उनकी टीम को बधाई दी।

प्रो. एसके सिंह ने बताया कि मरीज पेटेंट डक्टस आरटेरियोसिस गर्भस्थ शिशु के सर्कुलेटरी सिस्टम का सामान्य भाग होता है। यह दो बड़ी ब्लड वेसेल्स के बीच एक ऐसा छिद्र होता है जो रक्त को बच्चे के फेफड़े तक पहुंचने का माध्यम बनता है।

सामान्य तौर पर बच्चे के जन्म के बाद यह छिद्र बंद हो जाता है। लेकिन जब यह छिद्र बंद नहीं होता तो इसके खुले रहने से हृदय एवं फेफड़े दोनों पर संक्रमण होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इस छिद्र को बंद करने के लिए ऑपरेशन करना पड़ता है। 
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