लिवर प्रत्यारोपण करने वाली केजीएमयू के डॉक्टरों की टीम
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पहला लिवर प्रत्यारोपण करके केजीएमयू ने बृहस्पतिवार को इतिहास रच दिया। 12 घंटे तक चले प्रत्यारोपण के लिए 50 डॉक्टरों व अस्पताल स्टॉफ की टीम जुटी रही। दिल्ली के मैक्स अस्पताल के विशेषज्ञों की मदद से केजीएमयू के गेस्ट्रो सर्जरी समेत अन्य विभाग के विशेषज्ञों ने बीमार पति में पत्नी का लिवर प्रत्यारोपित किया।
डॉक्टरों के मुताबिक, डोनर पत्नी को होश आ गया है। मरीज-डोनर को प्रत्यारोपण बाद आईसीयू में शिफ्ट कराया गया है। लिवर प्रत्यारोपण करने वाली टीम को केजीएमयू कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने बधाई दी। कुलपति ने कहा कि यह केजीएमयू की वर्ष 2019 की पहली ऐतिहासिक सफलता है।
सिरोसिस से पीड़ित था रायबरेली निवासी
रायबरेली का रहने वाला 50 वर्षीय मरीज लिवर सिरोसिस बीमारी की चपेट में था। तीमारदार लिवर प्रत्यारोपण के लिए कई संस्थानों में गए मगर वहां पर बताए गए खर्च को तीमारदार उठा नहीं पा रहे थे। इसके बाद तीमारदार केजीएमयू गेस्ट्रो सर्जरी विभाग आए। विभागाध्यक्ष डॉ. अभिजीत चंद्रा ने भी प्रत्यारोपण की जरूरत बताई और कुलपति डॉ. एमएलबी भट्ट से लिवर प्रत्यारोपण के बारे में चर्चा की। कुलपति ने लिवर प्रत्यारोपण करने पर मुहर लगा दी।
पांच दिन तक चलती रही पत्नी की काउंसलिंग
डेमो
डॉ. अभिजीत चन्द्रा ने बताया कि डोनर की शांत मन:स्थिति और उसका राजी होना काफी मायने रखता है। हमारी टीम ने लगातार पांच दिन तक मरीज की पत्नी की काउंसलिंग की। उसके राजी होने के बाद प्रत्यारोपण के लिए जरूरी कागजी कार्रवाई की गई। इसके बाद दिल्ली स्थित मैक्स हॉस्पिटल के लिवर प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. सुभाष गुप्ता से संपर्क कर उन्हें आमंत्रित किया गया। आईएलबीएस संस्थान के विशेषज्ञों को भी आमंत्रित किया। हालांकि 15 दिन से प्रत्यारोपण की तैयारी चल रही थी, बस डोनर को राजी किया जाना बाकी था।
ऐसे बनाया विभिन्न विभागों में तालमेल
टीम के डॉ. परवेज ने बताया कि लिवर प्रत्यारोपण की सहमति मिलने बाद करीब 15 दिन से तैयारी चल रही थी। रेडियोथेरेपी विभाग की विशेषज्ञ डॉ. नीरा कोहली व डॉ. अनिकेत परिहार ने शरीर के विभिन्न अंगों की जांच की। ब्लड लॉस होने पर ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग की प्रभारी डॉ. तूलिका चंद्रा ने मरीज व डोनर के ब्लड की स्क्रीनिंग करके ब्लड व उसके अन्य अवयव को तैयार रखा। सर्जिकल गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के डॉ. अभिजीत चंद्रा ने प्रत्यारोपण करने की अन्य तकनीक खामियों को दूर करके टीम का गठन किया।
महज सात से आठ लाख आया खर्च
डेमो
डॉ. अभिजीत कहते हैं कि कम संसाधनों में लिवर प्रत्यारोपण चुनौतीपूर्ण था। पर इसकी सफलता से उन मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी, जिनके लिए 30-35 लाख रुपये का खर्च उठाना संभव नहीं। बृहस्पतिवार को किए ऑपरेशन में महज सात से आठ लाख रुपये का खर्च आया है।
इनका रहा सहयोग
मैक्स हॉस्पिटल दिल्ली के लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. सुभाष गुप्ता, डॉ. राजेश, केजीएमयू प्रो. अभिजीत चंद्रा, डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. प्रदीप जोशी, डॉ. परवेज, डॉ. अनीता मलिक, डॉ. तन्मय तिवारी, डॉ. अनित परिहार, डॉ. रोहित, डॉ. नीरा कोहली, डा. तुलिका चंद्रा, बेहोशी के डॉ. एहसान समेत टेक् नीशियन व स्टॉफ मिलाकर करीब 50 लोग शामिल थे।